रेलवे बोला- नहीं थी दशहरा उत्सव की जानकारी, लोगों ने कहा- 20 साल से यहीं जल रहा रावण

50 वर्षीय जसवंत ने बताया कि रावण दहन इस जगह पर होता है और रामलीला का कार्यक्रम रेलवे ट्रैक से कुछ दूरी पर होता है. जसवंत ने कहा कि रावण दहन के वक्त पटाखों का शोर बेहद तेज था इस वजह से लोगों को ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी.
अमृतसर में हुए रेल हादसे में 60 लोगों की मौत के बाद रेलवे बोर्ड प्रमुख अश्वनी लोहानी से साफ कर दिया है कि इसमें रेलवे की कोई गलती नहीं थी. उन्होंने कहा कि रेलवे को दशहरा उत्सव के संबंध में जानकारी नहीं दी गई थी. शनिवार को न्यूज 18 से खास बातचीत में लोहानी ने कहा, “हादसा अमृतसर और मनवाला स्टेशन के बीच हुआ. किसी क्रॉसिंग के पास नहीं.” वहीं केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भी कहा है कि इस हादसे में रेलवे की कोई चूक नहीं थी.
लोहानी ने कहा, ‘मिड सेक्शन में ट्रेनें अपनी तय स्पीड पर दौड़ती हैं और वहां पर लोगों को नहीं होना चाहिए. इन जगहों पर रेलवे स्टाफ की पोस्टिंग नहीं होती है. हमारा स्टाफ क्रॉसिंग्स पर तैनात होता है जो ट्रैफिक रोकने की काम करता है.’ उन्होंने कहा, “यदि ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया होता तो और बड़ा हादसा हो सकता था.” उन्होंने कहा कि ट्रेन तय स्पीड पर दौड़ रही थी और रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्राइवर ने ब्रेक भी लगाया था जिससे ट्रेन की गति धीमी हो गई थी.
लोहानी ने कहा, “उत्सव के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं दी गई थी और न ही हमसे कोई अनुमति मांगी गई थी.”
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि रावण दहन का कार्यक्रम पिछले 20 सालों से जोड़ा फाटक के करीब खाली जगह पर ही हो रहा है.
50 वर्षीय जसवंत ने बताया कि रावण दहन इस जगह पर होता है और रामलीला का कार्यक्रम रेलवे ट्रैक से कुछ दूरी पर होता है. जसवंत ने कहा कि रावण दहन के वक्त पटाखों का शोर बेहद तेज था इस वजह से लोगों को ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी. उन्होंने दावा किया कि इस ट्रेन से पहले दो और ट्रेनें घटनास्थल से गुजरी थीं लेकिन उनकी गति धीमी थी.
स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना शाम को करीब सवा सात बजे हुई जब बड़ी संख्या में लोग ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे. बलविंदर नाम के एक नागरिक ने बताया, “रावण का पुतला पिछले 20 सालों से यहीं पर जल रहा है लेकिन इससे पहले कभी ऐसा हादसा नहीं हुआ.”

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