रिपोर्ट- कस्बे के आसपास की ग्राम पंचायतों के हजारों एकड़ खेतों में हरी सब्जियां लहलहा रही हैं

हरी एवं ताजी सब्जी लेने का विचार जेहन में आते ही वजीरगंज की याद आ जाती है। कारण यहां क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित हरी सब्जियां हर मौसम में उपलब्ध हो जाती हैं। रोजाना यहां लाखों का कारोबार होता है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजी-रोटी मिल रही। यह बात दीगर है कि सब्जी उत्पादकों या कारोबारियों के लिए सुविधा व सहूलियत की बात दूर की कौड़ी है। इनके लिए न तो अबतक मंडी शेड की व्यवस्था हो सकी और न ही बिक्री के लिए कोई खास इंतजाम। अब जबकि लोकसभा चुनाव की गूंज है। ऐसे में एक बार फिर यहां के लोग चाहते हैं कि चुनाव लड़ रहे नेता और राजनीतिक दल इस समस्या के निदान का आश्वासन दें जिससे उनकी मेहनत का फल मिल सके।

किसानों व सब्जी व्यापारियों के इसी मुद्दे पर पेश है अजय सिंह व विजय शंकर शुक्ल की यह रिपोर्ट- कस्बे के आसपास की ग्राम पंचायतों के हजारों एकड़ खेतों में हरी सब्जियां लहलहा रही हैं। वर्तमान समय में भिडी, कद्दू, लौकी, करेला, लोबिया, परवल, बैंगन, खीरा, टमाटर आदि ताजी सब्जियां खेतों में तैयार हैं। इनके उत्पादन की मात्रा इतनी है कि क्षेत्र में खपत नहीं हो पाती। ऐसे में किसान खुद वाहनों में लादकर नवाबगंज, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर आदि शहरों में बिक्री के लिए ले जा रहे। मेहनत व लागत के बाद पैदा की जा रहीं इन सब्जियों की वाजिब कीमत किसानों को नहीं मिलती। कस्बे में अयोध्या गोंडा मार्ग पर ही सब्जीमंडी लगती है। यहां के किसान क्षेत्र को सब्जी पट्टी घोषित करने व कस्बे के आसपास सब्जी मंडी की मांग लगातार करते रहे हैं लेकिन, इनकी आवाज को हमेशा अनसुना किया जाता रहा। किसान रामबाबू मौर्य ने बताया कि यहां के किसानों की मेहनत का फायदा बाहरी व्यापारी उठाते हैं। उचित स्थान के अभाव में किसान मारा मारा फिर रहा है। दुकानदार मेराज ने बताया कि सुबह के समय गांवों से सब्जियों की आवक से सड़क जाम हो जाती है जिससे समस्या होती है। व्यापारी मुकेश मौर्य ने बताया कि यहां की सब्जी दूसरे प्रदेश तक जाती है लेकिन, क्षेत्र को पहचान नहीं मिल पाई। दुकानदार अरमान बोले कि क्षेत्र को जब तक सब्जी पट्टी नहीं घोषित किया जाता तबतक किसानों को उनकी मेहनत की वाजिब कीमत नहीं मिल पाएगी। नानबाबू ने कहा कि कस्बे के पास सब्जी मंडी के लिए जगह चिन्हित किया जाना चाहिए। बीडीसी मेंबर शुभम गुप्ता बोले कि जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। राजेंद्र तिवारी ने कहा कि किसानों की मांग जायज है पर ये बिना सरकारी सहयोग के नहीं हो सकता।

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