रायबरेली डीएम के बेतुके बोल, सीएमओ से कहा- ‘गधे कहीं के, खाल खींचकर जमीन में गाड़ दूंगा’

रायबरेली के डीएम सीएमओ से बोले- ‘गधे कहीं के, खाल खींच लेंगे, जमीन में गाड़ देंगे’
अलीगढ़ के डीएम ने सीएमएस से कहा था-सौ जूते मारेंगे
वाराणसी में भी डीएम की अभद्रता के बाद डाक्टरों ने की थी सामूहिक इस्तीफे की पेशकश
प्रदेश भर के पीएमएस संवर्ग के डाक्टरों में आक्रोश, शासन से शिकायत  

विश्ववार्ता ब्यूरो

लखनऊ। सूबे में डाक्टरों और ब्यूरोक्रेट के बीच तल्खी बढ़ गई है। तल्खी का कारण कोरोना का बेकाबू होना है। कोरोना केस बढ़ने से जहां सीएम नाराज होते हैं तो शासन के अफसरों की नाराजगी जिला स्तर पर डीएम, कमिश्नर तक पहुंचती है। स्थिति संभलती नहीं तो डीएम सीएमओ और सीएमएस पर अपना गुस्सा उतारते हैं। ऐसे में डीएम अपने पद की मर्यादा भूलकर अपशब्दों तक का प्रयोग करने से नहीं चूकते। शुक्रवार को ही रायबरेली के डीएम वैभव श्रीवास्तव ने वहां के सीएमओ को भरी बैठक में गधा बोला। साथ ही उनकी खाल खींचने और जमीन में गाड़ देने तक की धमकी दी। अपने अपमान से आहत सीएमओ डा.संजय शर्मा की तबीयत बिगड़ने लगी और वे मीटिंग छोड़कर आ गए। आहत सीएमओ ने बाद में डीएम की अभद्रता की शासन से शिकायत की और कहा कि ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो दिन-रात कोरोना वारियर्स के रूप में काम में लगे डाक्टरों का मनोबल गिरेगा।
इससे पहले अलीगढ़ के डीएम चंद्रभूषण सिंह ने वहां के सीएमएस और प्रभारी सीएमओ डा. विमल गुप्ता को सौ जूते मारने तथा अन्य अपशब्दों की प्रयोग किया था। डीएम की अभद्रता का यह आडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वाराणसी में भी वहां के डाक्टरों ने कोरोना में उनकी बेतरतीब ड्यूटी लगाने का विरोध किया था। जिस पर डीएम कौशल राज शर्मा ने वहां के डाक्टरों को घर से उठवाने की धमकी दी थी। जिसके विरोध में बड़ी संख्या में पीएमएस डाक्टरों अपने-अपने पद से सामूहिक रूप इस्तीफों की पेशकश की थी। कानपुर में भी डीएम से डाक्टरों का कुछ विवाद हुआ था।
बहरहाल, ताजा मामला रायबरेली का है। डीएम रायबरेली वैभव श्रीवास्तव ने इतने बिगड़े बोल बोले कि सीएमओ डा.संजय शर्मा की तबीयत बैठक में ही बिगड़ गई और उन्हें मीटिंग छोड़कर जाना पड़ा। डीएम के रवैए की शिकायत पीड़ित सीएमओ ने स्वास्थ्य महानिदेशक व प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग संघ से लिखित रूप से की है। रायबरेली सीएमओ डॉ.शर्मा ने स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.डीएस नेगी को भेजे शिकायती पत्र में लिखा कि रायबरेली के अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले भोजन का प्रभार संभाल रहे डॉ.मनोज शुक्ल की पत्नी को प्री-कैंसर की पुष्टि हुई थी। शुक्रवार को डॉ.मनोज ने पत्नी के इलाज कराने के लिए लखनऊ जाने की अनुमति मांगी थी, मैं ने मानवीय दृषिकोण अपनाते हुए उन्हें मंजूरी दे दी थी। जिसकी वजह से डॉ.मनोज, समीक्षा बैठक में नही थे। इस बात को लेकर जिलाधिकारी ने मुझे भरी मीटिंग में गधा बोलते हुए गाली गलौज शुरू कर दी। इतना ही नहीं उन्होंने मेरी खाल खींच लेने और जमीन में गाड़ देने की धमकी तक दे डाली। मीटिंग में सीडीओ, एडीएम, सीओ सिटी, डॉ.मुनीन्द्र नारायण, डॉ.बीरबल, डॉ.एके चौधरी, डॉ.राधाकृष्ण, डॉ.बैसवार, डॉ.जैसल, डॉ.शम्स रिजवान, डीपीएम राकेश और डीएमओ डॉ.शरद कुमार वर्मा आदि कई अधिकारी मौजूद थे। सभी ने जिलाधिकारी के उक्त व्यवहार को देखा। जिलाधिकारी का यह व्यवहार पहली बार शुक्रवार को नही हुआ है, जिलाधिकारी हर मीटिंग में उल्टा-सीधा बोलते हैं। हम डॉक्टरों को हमेशा अपमानित करते हैं। ऐसी अपमानजनक स्थिति में कोरोना मरीजों का इलाज व अन्य सेवाएं देना असंभव हो गया है। खास बात यह है कि जनपदों में जिलाधिकारी के नेतृत्व में कोरोना मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए इंटीग्रेटेड कोविड एंड कमांड सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
पीएमएस संघ ने संभाला मोर्चा, सीएम को लिखा पत्र 
प्रदेश में जिलाधिकारियों द्वारा डाक्टरों के साथ होने वाली अभद्रता के खिलाफ यूपी पीएमएस संघ ने मोर्चा संभाल लिया है। संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ.अमित सिंह ने बताया कि कोरोना काल में जिलाधिकारी अपनी प्रशासनिक पॉवर का बेजा इस्तेमाल कर रहें हैं। डॉक्टरों से इलाज से लेकर एंबुलेंस आवंटन व भोजन बनवाने तक का कार्य लिया जा रहा है। जिसे सभी सीएमओ व डॉक्टर पूरे मनोयोग से कर रहे हैं। इसके बावजूद रात 10-12 बजे तक मीटिंग और सुबह जल्दी अकारण मीटिंग बुलाकर परेशान किया जा रहा है। मीटिंगों में जिलाधिकारियों द्वारा टेस्ट क्षमता बढ़ाने के टारगेट की बात लेकर सीएमओ को कुछ भी बोल दिया जा रहा है। जबकि डॉक्टर संवेदनशील होते हैं। सीएमओ सेक्रेटरी स्तर का अधिकारी होता है। इसके बावजूद जिलाधिकारी द्वारा अभद्रता की हदें पार की जा रही हैं। रायबरेली में यह दूसरा मामला है। इसके पहले एक ही स्कूल में मरीजों के साथ डॉक्टरों को क्वारेन्टाइन कराने का भी मामला उठ चुका है। बहरहाल, रायबरेली, अलीगढ़, वाराणसी और कानपुर के मामलों को लेकर पीएमएस संघ द्वारा 22 अगस्त, 2020 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर भी शिकायत की जा चुकी है। लेकिन इन मामलों में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिससे भविष्य में वे कोई भी कदम उठाने को वि‌वश होंगे।
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