राजस्थान में ‘ग्रीन क्रेडिट’ नीति लागू; पर्यावरण संरक्षण निवेश पर नकद छूट

राजस्थान सरकार ने ‘ग्रीन क्रेडिट नीति’ लागू कर दी है। इसके तहत पर्यावरण प्रोजेक्ट्स में निवेश पर 10% तक क्रेडिट वाउचर व 2.5 करोड़ रुपए तक का लाभ मिलेगा। इसे बेचा भी जा सकेगा।
राजस्थान को 2070 तक कार्बन मुक्त (Net-Zero) बनाने और पर्यावरण को बचाने की दिशा में राजस्थान सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के वित्त विभाग ने ‘राजस्थान ग्रीन क्रेडिट नीति’ (Rajasthan Green Credit Policy) की अधिसूचना जारी कर दी है। इस नीति के तहत अब पेड़ लगाने, जल संरक्षण करने और प्रदूषण कम करने वाली परियोजनाओं में निवेश करने वाली कंपनियों और निवेशकों को सरकार आर्थिक प्रोत्साहन देगी। प्रदेश की भजनलाल सरकार ने मौजूदा बजट में ग्रीन क्रेडिट नीति लाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही सरकार ने ग्रीन बजट भी पेश किया था।
क्या है ग्रीन क्रेडिट नीति?
यह कार्बन क्रेडिट की तर्ज पर शुरू की गई एक योजना है। यदि कोई निवेशक राजस्थान में पर्यावरण को सुधारने वाली किसी परियोजना (जैसे- सौर ऊर्जा, वेस्ट मैनेजमेंट या जल संचयन) में पैसा लगाता है, तो सरकार उसे ‘ग्रीन क्रेडिट वाउचर’ देगी। इस वाउचर का उपयोग निवेशक अपनी अगली परियोजना में वित्तीय छूट पाने के लिए कर सकता है या इसे किसी दूसरी कंपनी को बेच भी सकता है।
कितना मिलेगा फायदा? (इन्वेस्टमेंट स्लैब)
सरकार ने निवेश की राशि के आधार पर प्रोत्साहन तय किया है:
1 करोड़ रुपये तक के निवेश पर: निवेश राशि का 5% ग्रीन क्रेडिट।
1 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक के निवेश पर: निवेश राशि का 7.5% ग्रीन क्रेडिट।
10 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर: निवेश राशि का 10% ग्रीन क्रेडिट।
अधिकतम सीमा: एक निवेशक को अधिकतम 2.5 करोड़ रुपये तक का ग्रीन क्रेडिट मिल सकेगा।
किन क्षेत्रों में निवेश पर मिलेगा लाभ?
नीति के अनुसार, निम्नलिखित गतिविधियों को ‘ग्रीन इन्वेस्टमेंट’ माना जाएगा:
अक्षय ऊर्जा: सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाएं।
जल प्रबंधन: वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण (Recycling)।
अपशिष्ट प्रबंधन: कचरे से ऊर्जा बनाना और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट।
प्रदूषण नियंत्रण: वायु और मृदा प्रदूषण कम करने वाली तकनीकें।
जैविक खेती: स्थायी कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा देना।
खरीद और बिक्री का विकल्प (Trading)
इस नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘ट्रेडिबल’ होना है। यदि कोई निवेशक अपने क्रेडिट का उपयोग खुद नहीं करना चाहता, तो वह इसे बाजार में किसी दूसरी संस्था को बेच सकता है। हालांकि, इसे खरीदने वाली नई कंपनी मूल मूल्य का केवल 75% ही भुना सकेगी।
क्यों जरूरी है यह नीति?
राजस्थान सरकार का लक्ष्य 2030 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 350 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। चूंकि राज्य पानी की कमी और मरुस्थलीकरण जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, इसलिए औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। ‘ग्रीन बजट 2025-26’ के तहत सरकार ने पहले ही कुल बजट का 11.34% पर्यावरण के लिए आरक्षित किया है।





