यूपी: बिजली कपंनियों का एआरआर स्वीकृत, इस माह में शुरू होगी बिजली दरों पर सुनवाई

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दर तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन दिन के भीतर अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक करें। उपभोक्ताओं और अन्य पक्षों को इन पर आपत्ति और सुझाव देने के लिए 21 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद मार्च में इस पर सार्वजनिक सुनवाई शुरू होगी।
विभिन्न बिजली कंपनियों की ओर से पॉवर कॉर्पोरेशन ने 28 नवंबर को 1.18 लाख करोड़ का वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव दाखिल किया था। जिसे स्वीकृत कर लिया गया है। प्रस्ताव में करीब 12453 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया गया है।
इसमें बिजली खरीद पर लगभग 85305 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। साथ ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर करीब 3,837 करोड़ रुपये खर्च प्रस्तावित किया गया है। आयोग ने कहा है कि कंपनियों ने अभी तक बिजली दर बढ़ाने का स्पष्ट प्रस्ताव नहीं दिया है, इसलिए उनसे यह भी सार्वजनिक करने को कहा गया है कि वे कितनी बढ़ोतरी चाहती हैं। नोएडा पॉवर कंपनी का एआरआर भी मंजूर कर लिया गया है।
20 फीसदी महंगी हो सकती है बिजली
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आशंका जताई कि इन आंकड़ों के आधार पर बिजली करीब 20 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के पर होने वाला खर्च 3837 करोड़ दिखाया गया है।
सिर्फ इसी भार से दरें छह फीसदी महंगी हो जाएंगी जबकि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इसका खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। इसी तरह लगभग 13.07 फीसदी वितरण हानि भी पुनः मांगी गई है। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेशन पिछले दरवाजे से बिजली दरें बढ़ाने की साजिश में जुटा है, लेकिन उसकी हर साजिश को बेनकाब किया जाएगा।





