युद्ध के मुहाने पर भारत-चीन : एलएसी पर गोलीबारी, लड़ाकू विमानों ने भरी उड़ान, हवाई हलचल तेज

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क । पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव सोमवार रात गोलीबारी में बदल गया। पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय सैनिकों के चेतावनी देने पर रुकने के बजाय चीनी सैनिकों ने फायरिंग कर दी। इस पर भारतीय सैनिकों ने भी जवाबी फायरिंग की। देर रात उधमपुर एयर बेस से लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और लद्दाख सीमा पर हवाई हलचल तेज हो गई है। लगभग चार दशक बाद एलएसी पर दोनों तरफ से फायरिंग की गई है।
उल्लेखनीय है कि काला टॉप और हेल्मेट टॉप को अपने नियंत्रण में लेने के बाद से ही एलएसी पर तैनात भारतीय सैनिक हाई अलर्ट पर हैं। रात में चीनी सैनिक इन दोनों चोटियों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए आगे बढ़ रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए पहले चेतावनी दी गई और न रुकने पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गोलीबारी की घटना हुई है।
उधर, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वेस्टर्न थियेटर कमान के प्रवक्ता कर्नल झांग शुइली की ओर से देर रात दिए गए बयान में कहा गया कि भारतीय सैनिकों की ओर से उकसावे की कार्रवाई की गई। चीनी सैनिकोंने जवाबी कार्रवाई की। पीएलए प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय सेना ने अवैध रूप से पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे के पास शेनपाओ पहाड़ में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास को पार किया।
पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर की थाकुंग चोटी पर 29 – 30 अगस्त की रात चीनी घुसपैठ नाकाम किये जाने के बाद से भारत और चीन के बीच तनाव ज्याचरम पर है। इसके बाद ब्रिगेड कमांडर स्तर पर बातचीत के जरिए मसले का हल निकालने की कोशिश की गई, नाकाम रही। इसके बाद से लद्दाख में दोनों देशों की सेना के बीच टकराव बढ़ा। इस बार पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर का लगभग 70 किमी. क्षेत्र भारत और चीन के बीच नया हॉटस्पॉट बना है। यह नया मोर्चा थाकुंग चोटी से शुरू होकर झील के किनारे-किनारे रेनचिन ला तक है। भारत की सीमा में आने वाले इस इलाके में रणनीतिक महत्व की तमाम पहाड़ियों पर भारतीय सेना ने दो दिन के भीतर कब्जा कर लिया।
भारत के इस आक्रमक रुख से चीन सकते में आ गया और इस क्षेत्र में सैनिकों, आर्टिलरी और टैंक तनात कर दिए। ब्लैक टॉप चोटी के पास दोनों सेनाएं आमने-सामने और फायरिंग रेंज में आ गईं। थाकुंग चोटी से लेकर झील के किनारे-किनारे रेनचिन ला तक ऊंचाई वाली जगहों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती चीन को नागवार गुजरी और तभी से यहां तनावपूर्ण माहौल कम होने के बजाय बढ़ता ही रहा। पैन्गोंग झील के दक्षिणी छोर पर भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद चीन को शर्मिंदा करने वाली अमेरिकी खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया कि चीन ने भारत को उकसाने के लिए पैन्गोंग झील के इस इलाके में घुसपैठ की कोशिश की है।
सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने 03 सितम्बर को लेह पहुंचकर सीमा के हालातों की जानकारी ली। सेना प्रमुख ने दक्षिण पैंगोंग में सेना की कार्रवाइयों का जायजा लेने के लिए चुशुल का दौरा किया। उन्होंने अन्य क्षेत्रों में हवाई और जमीनी सर्वेक्षण भी किया। उन्होंने चीन को सख्त सन्देश दिया कि हमारे जवानों का जोश बरकरार है और हर स्थिति का सामना करने को तैयार हैं। इस इलाके में सेना ने थाकुंग चोटी से लेकर रेकिन ला तक लगभग 30 प्रमुख ऊंचाइयों पर कब्जा करके चीन के मुकाबले अच्छी रणनीतिक बढ़त बनाई है।
सीमा पर तनाव के बीच 05 सितम्बर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगही के साथ रूस की राजधानी मॉस्को में बैठक हुई। बैठक में भारत-चीन सीमा क्षेत्र के पश्चिमी क्षेत्र में गलवान घाटी सहित वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ हुए घटनाक्रम पर भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया। राजनाथ सिंह ने चीन को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पूर्वी लद्दाख में तनाव का एकमात्र कारण चीनी सैनिकों का आक्रमक रवैया है और ऐसा चलता रहा तो भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
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