यात्रियों ने चुराए 2 लाख तौलिए-81 हजार चादरें, रेलवे को लगा 4000 करोड़ का चुना

नई दिल्ली ।। कई बार कुछ इस तरह की खबरें पढ़ने को मिल जाती है, जिसके बाद मुंह से यही निकलता है कि – सच में इस देश का कुछ नहीं हो सकता। आज हम इतने निराशावादी इसलिए है क्योंकि खबर ही कुछ ऐसी है। खबर यह है कि पश्चिम रेलवे ने बीते साल लंबी दूरी की ट्रेन में सफ़र करने वाले यात्रीगणों द्वारा रेलवे का सामान चोरी करने का आंकड़ा पेश किया है।

इन आंकड़ो में बताया गया है कि कैसे पिछले साल पश्चिम रेलवें से सफ़र करने वालों ने रेलवे की संपत्ति पर अपना-अपना हाथ साफ किया है। किसी ने तौलिया चुराया, किसी ने तकिया चुराया, किसी ने कंबल चुराया तो कई यात्री अपनी यात्रा के समाप्त होने के बाद अपने साथ रेलवे द्वारा उपलब्ध कराई जाने वालीं चादर तक लेकर चंपत हो गए।
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जी हां, पश्चिम रेलवे ने हाल ही में पिछले वित्त वर्ष यात्रियों द्वारा चुराए गए रेलवे के सामानों की सूची जारी की है और इस सूची ने एक नागरिक के तौर पर हम सभी को शर्मिंदा कर दिया है। इस सूची के तहत पिछले एक साल में पश्चिम रेलवे से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए जाने वालें 1,95,778 तौलिए, 81,736 चादरें और 5038 तकिए अपने साथ लेकर चले गए।
इतना ही नहीं तो यात्री पिछले साल पश्चिम रेलवे के 55,573 पिलो कवर और 7,043 कंबल भी अपने घर लेकर चले गए। कुछ लोग तो इतने बेशर्मी निकले की उन्होंने टॉयलेट में इस्तेमाल किए जाने वाले 200 मग, 1,000 टोंटियां और 300 फ्लश पाइप भी चुरा लिए।

माना कि रेलवे स्टेशन और ट्रेन पर जगह-जगह –‘रेलवे हमारी संपत्ति है’ लिखा होता है। लेकिन इस वाक्य में यह कहीं नहीं लिखा होता है कि रेलवे हमारी निजी संपत्ति है। रेलवे निजी नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति है। बावजूद इसके उच्च श्रेणी में सफ़र करने वाले तथाकथित एलीट लोगों ने एक साल में पश्चिम रेलवे को 4000 करोड़ों का चूना लगा दिया।
यहां ध्‍यान देने वाली बात यह भी है कि यह आंकड़ा सिर्फ पश्चिम रेलवे का है। अगर देश के अन्‍य 16 रेलवे जोन के आंकड़े भी इसमें जोड़ दे तो स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाएगी। हम सबकों यह समझना होगा कि अगर हमें हमारे देश की सुरत बदलनी है, तो पहले खुद की सोच को बदलना होगा। वरना हमारी ऐसी हरकतों से घुमा-फिराकर हमारा ही नुकसान होगा।
फोटो- फाइल

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