मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा झटका, छह माह के निचले स्तर पर ग्रोथ रेट

देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि मार्च में घटी है और यह पिछले छह माह में सबसे निचले स्तर पर रही है. हालांकि इस बीच नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन और रोजगार में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है. यह बात कंपनियों के परचेजिंग मैनेजरों के बीच किए जाने वाले एक मासिक सर्वेक्षण में सामने आई है. यह रिपोर्ट निक्की इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) ने जारी की है.
आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री और इस रिपोर्ट की लेखिका पॉलियाना डि लामा ने कहा कि मार्च में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों की वृद्धि घटी है. क्षेत्र में ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और रोजगार सभी की वृद्धि कम रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में यह घटकर 52.6 अंक रहा जो फरवरी में 54.3 अंक था. फरवरी में पीएमआई का 54.3 अंक पर रहना, छह माह का निचला स्तर था. मार्च के आंकड़े दिखाते हैं कि वृद्धि की रुझान कम हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार मार्च में कारखानों को नए ऑर्डर मिलना और उत्पादन बढ़ना सितंबर के बाद सबसे कम गति से बढ़ा है. वहीं रोजगार निर्माण में यह वृद्धि दर आठ माह के निचले स्तर पर है. हालांकि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की परिचालन परिस्थितियों का बेहतर होना जारी है.
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कोर इंडस्ट्री की रफ्तार भी सुस्त
इससे पहले आठ बुनियादी यानी कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट भी फरवरी में घट गई है. कोर इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट 2.1 फीसदी पर आ गई. सालाना आधार पर यह 3.3 फीसदी कम है. इससे पहले फरवरी, 2018 में बुनियादी इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट 5.4 फीसदी रही थी.
बता दें कि बुनियादी इंडस्ट्री में शामिल आठ उद्योग- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली हैं. बुनियादी उद्योगों की ग्रोथ रेट के सुस्त पड़ने का असर कुल औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) पर पड़ने की आशंका है.आईआईपी की वृद्धि दर जनवरी महीने में धीमी पड़कर 1.7 फीसदी रह गई है. एक साल पहले यानी जनवरी, 2018 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 7.5 फीसदी रही थी.





