मुस्लिम शरणार्थियों को देना होगा 500 डालर की पेनाल्टी, जानिए मोदी सरकार के नए नियम…

नरेंद्र मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन विधेयक को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी तरह के कमर कस ली है. मोदी सरकार ने लोकसभा से नागरिकता संशोधन विधेयक को पास करा लिया है, जिसके बाद आज इसे राज्यसभा में पेश किया. इस विधेयक के कानूनी रूप धारण करते ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए 31,313 गैर मुस्लिम शरणार्थियों को फौरन भारत की नागरिकता मिल जाएगी, जिसके बाद उन्हें देश के रहने वाले बाकी लोगों की तरह ही सरकारी सुख-सुविधाएं उठाकर बेहतर जिंदगी गुजर कर सकेंगे.

नागरिकता संशोधन विधेयक पर देशभर में जारी बहस के बीच शरणार्थियों की संख्या को लेकर दो अलग-अलग आधिकारिक आंकड़े हैं. पहला आंकड़ा जनवरी 2019 के संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का है, जिसे इंटेलिजेंस ब्यूरो के आधार पर पेश किया गया है. जबकि, दूसरा आंकड़ा मार्च 2016 का है, जिसे तत्कालीन गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने संसद में एक सवाल के जवाब में संसद में बताया था. इसमें कहा गया था कि 31 दिसंबर 2014 की स्थिति के अनुसार इन तीनों देशों से आए शरणार्थियों की संख्या 1 लाख 16 हजार 85 है. हालांकि इसमें शरणार्थियों के धर्म का कोई जिक्र नहीं किया गया था.
एक रिपोर्ट के अनुसार, केन्द्र की मोदी सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बीते 20 माह के दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए कई नियमों में बदलाव किए हैं। नियमों में इन बदलावों से भारत में रहने वाले तीन पड़ोसी देशों से आने वाले शरणार्थियों (मुस्लिमों को छोड़कर) के लिए यहां रहना काफी आसान हो गया है।
नियमों में बदलावों के तहत शरणार्थी अब तय वीजा अवधि से भी ज्यादा समय तक भारत में रहने के साथ ही, बैंक अकाउंट भी खोल सकेंगे और आवासीय प्रॉपर्टी भी खरीद सकेंगे। बदले गए नियमों का फायदा सिर्फ हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को ही मिलेगा।
यह भी पढ़ें: झारखण्ड चुनाव: रुझानों में बीजेपी को बहुत बड़ा झटका, जानें कौन कितने पर आगे
द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च, 2018 में रिजर्व बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट रेगुलेशन्स एक्ट में कुछ बदलाव किए। इन बदलावों के तहत एक्ट के सेक्शन 7 में एक नया क्लॉज जोड़ा गया। इसके तहत जो पाकिस्तान, शरणार्थी लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत में रह रहे हैं, वह बदले नियमों के तहत यहां आवासीय संपत्ति भी खरीद सकेंगे।
बैंक खाता खोलने में होगी सुविधाः नवंबर, 2018 में आरबीआई ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक शरणार्थियों को NRO (Non Resident Ordinary) बैंक खाता खोलने की सुविधा दी थी। नए नियमों को फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (संशोधन) रेगुलेशन एक्ट नाम दिया गया है।
इसके तहत भारत में लंबी अवधि के वीजा पर भारत में रह रहे हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, पारसी और बौद्ध शरणार्थी बैंक में NRO खाता खोल सकेंगे। NRO खाता खोलने के लिए जो फॉर्म भरवाया जा रहा है, उसमें खाताधारक के धर्म संबंधी भी एक कॉलम हैं।
वीजा से ज्यादा अवधि तक रहने पर लगने वाले जुर्माने में भी दी छूटः बदले हुए नियमों के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन शरणार्थियों को वीजा की अवधि से अधिक समय तक भारत में रहने पर लगने वाले जुर्माने में भी छूट दी गई है।
फॉरनर रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस के नियमों के मुताबिक हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन शरणार्थियों को वीजा अवधि से 2 साल ज्यादा रहने पर 500 रुपए बतौर जुर्माने देने होंगे। वहीं यदि वह शरणार्थी मुस्लिम है, तो उसे जुर्माने के तौर पर 500 डॉलर यानि कि करीब 35 हजार रुपए देने होंगे।





