मुंबई में मेट्रो शेड के निर्माण के लिए बांबे HC के आदेश पर हो रही पेड़ों की कटाई का विरोध…

मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो शेड के निर्माण के लिए बांबे हाई कोर्ट के आदेश पर हो रही पेड़ों की कटाई का विरोध तेज हो गया है। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग आरे कॉलोनी पहुंच गए और पेड़ों की कटाई का विरोध किया। लोगों को पुलिस ने कॉलोनी में घुसने से रोका। 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 60 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। आरे कॉलोनी और आस-पास के क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने यह कहते हुए पेड़ों की कटाई का बचाव किया है कि विकास के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है।

एएनआइ के मुताबिक, मुंबई में आरे मामले में गिरफ्तार किए गए 29 प्रदर्शनकारियों को जमानत दे दी गई है।

बांबे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि मुंबई महानगरपालिका के वृक्ष प्राधिकरण का मेट्रो-3 के लिए वृक्षों की कटाई का निर्णय पूरी तरह उचित, पारदर्शी और तर्कसंगत है। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई रोकने के लिए दायर जोरू बाथेना की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार देर शाम पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। इस कार्य के लिए 2,464 पेड़ काटे जाने हैं। पेड़ों की कटाई की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग आरे कॉलोनी पहुंचने लगे। वहां नागरिकों का हुजूम जुट गया और विरोध प्रदर्शन चालू हो गया।

सरकार में भाजपा की सहयोगी शिवसेना की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी शनिवार को सुबह आरे कॉलोनी पहुंच गईं। पुलिस के साथ उनकी धक्कामुक्की भी हुई। लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर कहा कि आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई करवाने वाले अधिकारियों को गुलाम कश्मीर भेज देना चाहिए, ताकि वे पेड़ों को काटने के बजाय वहां जाकर आतंकवादियों के कैंप नष्ट करें। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों की गिरफ्तारी पर आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से दखल देने की अपील की। वहीं उनके पिता उद्धव ठाकरे ने भी समय आने पर पेड़ों की हत्या करनेवालों को देख लेने की धमकी दी है।

विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से भी वृक्ष काटने की निंदा की गई है। टिकट बंटवारे के मुद्दे पर कल तक अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर बरस रहे मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि पीएम मोदी की पर्यावरण को बचाने की खोखली बातें सिर्फ दुनिया को लुभाने के लिए थीं। घर में उनकी सरकार का काम एकदम अलग है। वृक्षों की कटाई रोकने के लिए कुछ लोग पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल भी कर रहे हैं।

जावडेकर ने दिल्ली मेट्रो से की तुलना

समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने लखनऊ में दिल्ली मेट्रो से मुंबई मेट्रो की तुलना करते हुए कहा कि दिल्ली मेट्रो के पहले चरण का काम जब शुरू हुआ था, तब 20-25 पेड़ काटे गए थे। उस समय भी इसका विरोध हुआ था। आज दिल्ली मेट्रो दुनिया की सबसे बेहतर मेट्रो है। अगर पेड़ नहीं काटे गए होते तो इसका विकास कैसे होता। दिल्ली मेट्रो ने एक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए। उन्होंने कहा कि विकास के साथ ही साथ पर्यावरण की रक्षा भी होनी चाहिए।

जानें, क्या है आरे कॉलोनी

मुंबई के उपनगर गोरेगांव में स्थित आरे कॉलोनी महानगर के बीचोबीच स्थित एक हरित पट्टी है। 16 वर्ग किलोमीटर में स्थित यह हरित पट्टी मुंबई महानगर को दुग्ध आपूर्ति करने वाले पशुओं को रखने के लिए 1949 में विकसित की गई थी। इसका एक सिरा संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा है, तो एक सिरे पर पवई लेक, तुलसी लेक और विहार लेक जैसी बड़ी-बड़ी तीन झीलें भी हैं।

2,646 पेड़ काटे जाने हैं 

मुंबई मेट्रो रेल कार्पोपेशन लिमिटेड इसी आरे कॉलोनी के एक हिस्से पर मेट्रो फेज तीन के लिए कारशेड बनाने जा रही है, जिसके लिए 2,646 वृक्ष काटे जाने की योजना है। पर्यावरणविद् इसका विरोध कर रहे हैं।

हाई कोर्ट ने खारिज की याचिकाएं 

बांबे हाई कोर्ट में वृक्षों की कटाई रोकने के लिए चार याचिकाएं दायर की गई थीं। लेकिन जस्टिस प्रदीप नंदराजोग एवं जस्टिस भारती डांगरे ने आरे कॉलोनी को वनक्षेत्र घोषित करने एवं मेट्रो कारशेड के लिए मिली मंजूरी को रद करने के लिए दायर चारों याचिकाएं खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने एक याचिका दायर करनेवाले शिवसेना सभासद पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जाधव स्वयं बीएमसी के उस वृक्ष प्राधिकारण के सदस्य हैं, जिसने 2646 पेड़ काटने की मंजूरी दी है।

अदालत के फैसले का सम्मान हो 

मुंबई मेट्रो रेल कार्पोरेशन की प्रबंध निदेशक अश्रि्वनी भिड़े ने शुक्रवार से चल रहे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पेड़ों की कटाई का विरोध करने वालों को झूठी बातें फैलाने के बजाय हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

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