मीरा कुमार का भी कानपुर से है बहुत गहरा नाता

यूपीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार का भी कानपुर से गहरा नाता है। कानपुर उनकी ननिहाल है। उनके नाना-नानी खपरा मोहाल में रहते थे। किदवई नगर में कुछ वर्ष पूर्व तक उनके ममेरे भाई रहा करते थे। उनकी फुफेरी बहन पुष्पलता दयाल पति ईश्वर दयाल और बेटे मोहित के साथ शास्त्रीनगर के गुलमोहर अपार्टमेंट में रह रही हैं।
मीरा कुमार का भी कानपुर से है बहुत गहरा नाता
मीरा कुमार अक्सर उनके घर आती रहीं हैं। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद फिलहाल उनका शहर आना तो नहीं हुआ है, लेकिन संचार के माध्यमों से उनका संपर्क दयाल परिवार से बना हुआ है। मीरा कुमार के राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी के रूप में चयन की घोषणा के बाद से ही दयाल परिवार बेहद खुश है। पूरा परिवार मीरा कुमार के राष्ट्रपति बनने की प्रार्थना ईश्वर से कर रहा है। अमर उजाला ने दयाल परिवार से मीरा कुमार के कुछ अनछुए पहलुओं को जानने की कोशिश की।

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मीरा कुमार के व्यक्तित्व के बारे में बताते हुए पुष्पलता ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष रहने के दौरान मीरा दीदी टीवी पर जैसी नजर आईं, वह वाकई में वैसी ही हैं। बेहद मृदुभाषी, सौम्य और सहज। वह जब भी मिलीं, इमानदारी और सही राह पर चलते की ही बात बताई। वह उनसे करीब 10-11 साल बड़ी हैं। इसलिए हमेशा अच्छी बातें सिखाती रहीं। घर-परिवार के समारोह में उनसे मुलाकात होती है। कभी उनसे मिलकर ऐसा नहीं लगता कि इतनी बड़ी शख्सियत के साथ हूं।

2005 में आईं थीं कानपुर
पुष्पलता ने बताया कि 2005 में उनकी बेटी मोनिका दयाल की शादी में हिस्सा लेने के लिए मीरा दीदी कानपुर आईं थीं। उस समय वह सामाजिक न्याय मंत्री थीं। वह पूरे दिन साथ रहीं। इसके बाद वह लोकसभा अध्यक्ष हो गईं और फिर व्यस्तता के चलते घर नहीं आ पाईं। हालांकि हम जरूर दिल्ली जाकर मिलते रहे। वह अभी भी कानपुर आने का कोई मौका नहीं छोड़ती।

ट्रांसफर रुकवाने से किया इंकार
पुष्पलता पंजाब नेशनल बैंक से असिस्टेंट मैनेजर के पद से रिटायर हुईं हैं। उन्होंने एक संस्मरण बताया कि उनका तबादला बैंक की ग्रामीण शाखा में कर दिया गया। वह वहां नहीं जाना चाहती थीं। उन्होंने तबादला रुकवाने के लिए मीरा कुमार को फोन किया। उन्होंने पूरी बात सुनने के बाद उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। अभिभावक की तरह काफी देर तक समझाया। उन्होंने कहा कि यह नौकरी का हिस्सा है, जाओ मन लगाकर काम करो।

ऑटो से आईं थीं सर्किट हाउस
एक बार वह कानपुर आईं। उनको लेने के लिए कार समय पर स्टेशन नहीं पहुंची तो वह मेरे साथ ऑटो में बैठकर सर्किट हाउस के लिए चल दीं। रास्ते में शहर की सड़कों और जाम की स्थिति से वह खासी असहज दिखीं।

धर्मपरिवर्तन के कार्यक्रम में नहीं हुईं शामिल
कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं ने एक बार धर्म-परिवर्तन से जुड़ा कोई आयोजन रखा। शहर आकर जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो नाराजगी जताते हुए उन्होंने कार्यक्रम में जाने से इंकार कर दिया। उन्होंने पदाधिकारियों को कभी ऐसे कार्यक्रम में न बुलाने की हिदायत दी।

देश से बेहतर कुछ नहीं
मेरे बेटे ने जब उनसे विदेश की अच्छी बातें मीरा दीदी से पूछीं तो उन्होंने कहा कि पढ़ाई के लिए तो विदेश जाना ठीक है, लेकिन रहने के लिए अपने देश से अच्छी जगह कोई नहीं।

ईश्वर करें वह बनें देश की राष्ट्रपति
पुष्पलता ने कहा कि हम राजनीति के बारे में तो ज्यादा नहीं जानते, लेकिन ईश्वर से यही प्रार्थना है कि मीरा दीदी देश की राष्ट्रपति बनें। यह शहर के साथ देश के लिए भी गौरव की बात होगी।

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