मिशन अयोध्या पर परिवारवाद की छाया …?

अयोध्या. सूबे की सियासत में एक तरफ जहाँ समाजवादी पार्टी परिवारवाद से उबर नहीं पा रही है, वहीँ अयोध्या सीट को लेकर समाजवादी पार्टी की गंभीरता मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के दिए जा रहे बयानों से लगातार जगजाहिर होती जा रही है. जिस तरह हाल ही में समाजवादी पार्टी का परिवारवाद सडक पर लड़ाई के रूप में दिखना शुरू हो गया, उसी का असर है कि जिले स्तर की राजनीति में भी परिवारवाद का और परिवार की लड़ाई का असर साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है. फैजाबाद जिले की अयोध्या सीट पर राजनीतिक परिणाम का असर पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीती पर प्रभाव डालता है.

इस बात को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बाखूबी समझते हैं. इसी लिए जहाँ एक तरफ मुलायम सिंह यादव मुसलमानों को बार-बार अयोध्या में हुए गोली काण्ड की याद दिला कर हितैषी बनने की कोशिस में लगे हैं. वहीँ दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव साधु-संतों को अयोध्या में भजन संध्या स्थल दे कर और मुख्यमंत्री आवास पर वैदिक मंत्रोच्चार करा अपने पाले में लाने का प्रयास कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी भी ये जानती है की अगर २०१९ में फिर से उत्तर प्रदेश पर कब्ज़ा करना है तो २०१२ में हाथ से निकल गई अयोध्या की सीट पर फिर से २०१७ में झंडा गाड़ना होगा.
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अभी हाल ही में फैजाबाद – अयोध्या में मेडिकल कालेज के रूप में अरबों रुपये की सौगात दे कर भारतीय जनता पार्टी नें जिस तरह से इस प्रोजेक्ट को अपने पाले में लाने की कोशिस की वो भारतीय जनता पार्टी की २०१७ में अयोध्या में पुनः वापसी के लिए रस्सा-कसी की तस्वीर को साफ़ तौर पर बयां कर रही है. तब जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ४०% अंशदान और जमीन उपलब्ध करवाने की बात कई बार अपने पीसी में कही है और उसी कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को बैठने के लिए जगह तक की व्यवस्था न देना, कही न कहीं भारतीय जनता पार्टी की अयोध्या के प्रति गंभीरता और कसमसाहट को फौरी तौर पर बयां करती नजर आ रही है.

हालाँकि अभी तक भारतीय जनता पार्टी ने अयोध्या सीट से अपन उमीदवार घोषित नहीं किया पर सूत्रों के हवाले से खबर है की भारतीय जनता पार्टी पूर्व की तरह ठाकुर प्रत्याशी पर दावं लगाने के मूड में है. जिसमें सबसे चर्चित नाम फैजाबाद से बीजेपी सांसद लल्लू सिंह की पत्नी और पुत्र हैं. लगातार २२ वर्षों तक अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी का इकबाल बुलंद करने वाले लल्लू सिंह राजनीती के मंझे खिलाड़ी के रूप में जाने जाते हैं. वहीँ दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अयोध्या सीट को ले कर गंभीर तो दिख रहा है, पर जमीनी स्तर पर वर्तमान सपा विधायक और प्रदेश में वन राज्य मंत्री तेज नारायण पाण्डेय उर्फ़ पवन पाण्डेय अपने कारगुजारिओं और विवादित कार्यों से जनता के साथ साथ संगठन और नेतृत्व में लगातार कमजोर पड़ते दिख रहे हैं.

समाजवादी पार्टी को लगभग 5 हजार मतों से २०१२ में अयोध्या सीट पर विजयश्री मिलने में सबसे बड़ा योगदान समाजवादी पार्टी के राजनीती के चाणक्य और खांटी समाजवादी विचारक के रूप में पहचाने जाने वाले जिला अध्यक्ष जय शंकर पाण्डेय का रहा है. लगभग ४० वर्षों से मुलायम सिंह के विश्वसनीय साथी के रूप में पहचाने जाने वाले जयशंकर पाण्डेय ने २०१२ के विधानसभा चुनाव में अपने भांजे पवन पाण्डेय को टिकट दिलाया था. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार विधायक बनने के बाद कभी हजार रुपये के लिए मोहताज रहने वाले पवन पाण्डेय नें अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में अरबों-खरबों की अकूत संपत्ति पैदा कर आम जनता के साथ साथ अपने करीबियों को भी अपने से दूर कर दिया.
कभी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले पवन पाण्डेय ने मौका देख पाला बदल कर शिवपाल यादव के खेमे में अपनी जगह बना ली. जो हाल ही में सड़क पर पहुची समाजवादी परिवार की लड़ाई में शिवपाल यादव के खेमे में खड़े होकर साफ़ कर दी है. इसके साथ ही लगातार मजबूत साथियों द्वारा पवन पाण्डेय से दूरी बना कर खुद अयोध्या से दावेदारी करना मौजूदा विधायक को महँगी पड़ सकती है.
कभी करीबियों में रहे सूर्यकान्त पाण्डेय ने सपा छोड़ कर भारतीय कम्मुनिस्ट पार्टी और का.सु. साकेत महाविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष बंसी लाल यादव द्वारा विरोध कर खुद दावेदारी करना मौजूदा विधायक के ब्राम्हण और यादव वोट बैंक पर हो रही कमजोर पकड़ को साबित करने के लिए काफी है. ऐसे समय में अयोध्या की प्रतिष्ठापूर्ण सीट को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी जिला अध्यक्ष जयशंकर पाण्डेय या युवाओं में अपनी ख़ास पहचान रखने वाले जिला अध्यक्ष के पुत्र डा.आशीष पाण्डेय ‘दीपू’ पर दावं लगा सकती है.
डा. आशीष पाण्डेय दीपू लगातार कई वर्षों से मुलायम और अखिलेश के नाम पर सबसे बड़े जन्मोत्सव कार्यक्रमों की श्रृखला में सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कर जनता की वाह-वाही पाने के साथ साधु-संतों को अपने पाले में करते हुए शीर्ष नेतृत्व और पार्टी के बड़े नेताओं से शाबाशी भी पा चुके हैं. साथ ही डा. आशीष पाण्डेय दीपू ने फैजाबाद जनपद में सर्वाधिक रक्तदान का अनोखा रिकार्ड कायम कर आम जनता के दिलों में अपनी अलग जगह बना ली है.

वहीँ विधान परिषद् सदस्य आनंद भदौरिया के साले और सयुस महासचिव राहुल सिंह भी अपने प्रयासों से अयोध्या सीट पर दावेदारी पेश कर रहे हैं. फैजाबाद में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के पुराने लोगों में से एक काबिना मंत्री अवधेश प्रशाद के पुत्र अजित प्रशाद की जगदीशपुर (सुरक्षित) से टिकट की घोषणा के साथ ही एक बार फिर अयोध्या सीट पर परिवारवाद की छाया साफ़ पड़ती नजर आ रही है.





