मालेगांव ब्लास्ट मामले में ले. कर्नल पुरोहित पहुंचे NIA कोर्ट, रिहाई पिटीशन पर फैसला जल्द…

नई दिल्ली. मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की रिहाई पिटीशन पर मंगलवार को स्पेशल एनआईए कोर्ट फैसला सुनाएगा। पुराेहित कोर्ट पहुंच चुके हैं। बता दें कि पुरोहित नौ साल से जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनको सोमवार को जमानत दे दी थी। 29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में बम धमाका हुआ था, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 100 लोग जख्मी हुए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और पुरोहित सहित 12 लोग अरेस्ट किए गए थे।

रिहाई के बाद यूनिट को रिपोर्ट करेंगे…
– पुरोहित जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अपनी यूनिट को रिपोर्ट करेंगे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, पुरोहित को 20 जनवरी 2009 को गिरफ्तारी के बाद सस्पेंड कर दिया गया था। उस वक्त वे सेना की पचमढ़ी स्थित यूनिट में तैनात थे।
– सूत्रों का कहना है कि सस्पेंड अफसर या जवान को जमानत मिलने पर उसे 24 घंटे में अपनी यूनिट में रिपोर्ट करना होता है। सेना मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते
हुए उसके सस्पेंशन का रिव्यू करती है। इस दौरान उसको ‘ओपन एरेस्ट’ यानी खुली गिरफ्तारी में रखा जाता है और उसकी एक्टिविटी पर नजर रखी जाती है। उसे वर्दी पहनना
जरूरी होता है, लेकिन विशेष अनुमति में वह सादे कपड़े भी पहन सकता है।
जरूरी होता है, लेकिन विशेष अनुमति में वह सादे कपड़े भी पहन सकता है।
सैलरी का 25% मिलता था
– निलंबन के बाद ले. कर्नल पुरोहित को 25 प्रतिशत वेतन दिया जाता था लेकिन जब उन्होंने सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण में इस बारे में अपील की तो इसे बढाकर वेतन का
75 प्रतिशत कर दिया गया था।
– पुरोहित की रिहाई के बाद सेना की ओर से यह भी तय किया जा सकता है कि वे किस क्षेत्र में आ-जा सकते हैं और किसमें नहीं। उनके मनोरंजन कक्षों और सभास्थलों में
– पुरोहित की रिहाई के बाद सेना की ओर से यह भी तय किया जा सकता है कि वे किस क्षेत्र में आ-जा सकते हैं और किसमें नहीं। उनके मनोरंजन कक्षों और सभास्थलों में
आवागमन के बारे में भी दिशा निर्देश दिए जा सकते हैं।
SC ने क्या कहा था?
– सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरके. अग्रवाल और एएम. सप्रे की बेंच ने सोमवार को कहा था कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट के उस ऑर्डर को खारिज करते हैं, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल
को जमानत देने से इनकार किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह पुरोहित को जमानत देने के लिए उन पर कुछ शर्तें लगा रहा है। इनमें देश से बाहर जाने पर रोक भी
शामिल है। इसके अलावा उन्हें सख्त ताकीद की गई है कि वो किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
– बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी।
– बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी।
पुरोहित की ओर से क्या दलीलें दी गईं?
– कर्नल पुरोहित की ओर से जाने-माने वकील हरीश साल्वे ने गवाहों के बयानों पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा कि न्याय के हित में कर्नल पुरोहित को जमानत पर रिहा
करने का आदेश दिया जाना चाहिए, जबकि एनआईए ने उनके इस अनुरोध का पुरजोर विरोध किया था।
– 17 अगस्त को पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उन्हें राजनीति के आपसी टकराव की वजह से पकड़ा गया और वे नौ साल से जेल में बंद हैं। पिटीशन में उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे दी, लेकिन उनको नहीं। उन्हें भी समानता के आधार पर जमानत दी जाए।
– 17 अगस्त को पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उन्हें राजनीति के आपसी टकराव की वजह से पकड़ा गया और वे नौ साल से जेल में बंद हैं। पिटीशन में उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे दी, लेकिन उनको नहीं। उन्हें भी समानता के आधार पर जमानत दी जाए।
– पिटीशन में यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने सेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की उस रिपोर्ट पर गौर नहीं किया, जिसमें कहा गया है कि वे सेना के लिए इंटेलिजेंस का काम
करते थे।
विरोध में क्या तर्क दिए गए?
– एनआईए की दलील थी कि ले. कर्नल पुरोहित के खिलाफ काफी सबूत हैं, जबकि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
– ब्लास्ट के विक्टिम में से एक के पिता हाजी सैयद बिलाल ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत पर रिहा करने के हाईकोर्ट के 25 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी। हाजी बिलाल ने
– ब्लास्ट के विक्टिम में से एक के पिता हाजी सैयद बिलाल ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत पर रिहा करने के हाईकोर्ट के 25 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी। हाजी बिलाल ने
सुप्रीम कोर्ट से प्रज्ञा ठाकुर की जमानत रद्द करने की अपील की थी।
एजेंसियों की चार्जशीट में फर्क है- SC
– सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पाया कि मामले की जांच करने वाली अलग-अलग एजेंसियों की चार्जशीट में फर्क है। कोर्ट ने कहा- पुरोहित की बेल सिर्फ इस
आधार पर नहीं रोकी जा सकती कि क्योंकि ‘एक कम्युनिटी की भावनाएं उनके खिलाफ हैं।’
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एटीएस और एनआईए ने जो चार्जशीट दायर की हैं, उनमें कुछ सबूत विरोधाभासी हैं। इनको सुनवाई के दौरान जांचा जाएगा। लेकिन, ये अपनी पसंद
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एटीएस और एनआईए ने जो चार्जशीट दायर की हैं, उनमें कुछ सबूत विरोधाभासी हैं। इनको सुनवाई के दौरान जांचा जाएगा। लेकिन, ये अपनी पसंद
के आधार पर नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “एक नागरिक की आजादी जरूरी है लेकिन इसे किसी कम्युनिटी की सिक्यिुरिटी से बैलेंस किया जाना चाहिए।”
– सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पुरोहित की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने इस मामले में एनआईए से जवाब भी मांगा था।
– इसके जवाब में एनआईए ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की जमानत का विरोध किया था। बता दें कि ट्रायल कोर्ट और
– सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पुरोहित की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने इस मामले में एनआईए से जवाब भी मांगा था।
– इसके जवाब में एनआईए ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की जमानत का विरोध किया था। बता दें कि ट्रायल कोर्ट और
हाईकोर्ट ने माना था कि कर्नल पुरोहित बम बनाने और सप्लाई करने में शामिल थे।
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साध्वी प्रज्ञा समेत 7 को अप्रैल में मिली थी जमानत
– मालेगांव ब्लास्ट मामले में ही आरोपी प्रज्ञा ठाकुर और उनके छह सहयोगियों को इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। प्रज्ञा ठाकुर को 5 लाख के निजी
मुचलके पर जमानत दी गई थी। उस वक्त कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया (prima facie) साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।
– कोर्ट ने यह भी कहा था कि साध्वी प्रज्ञा एक महिला हैं और 8 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है और वो कमजोर हो गई हैं, बिना सहारे चलने में भी
– कोर्ट ने यह भी कहा था कि साध्वी प्रज्ञा एक महिला हैं और 8 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है और वो कमजोर हो गई हैं, बिना सहारे चलने में भी
लाचार हैं। इससे पहले स्पेशल मकोका कोर्ट ने कहा था कि एटीएस साध्वी प्रज्ञा, पुरोहित और नौ अन्य लोगों पर गलत तरीके से यह कानून (मकोका) लगाया है।
– एटीएस ने 4000 पेज की चार्ज शीट में आरोप लगाया गया था कि मालेगांव को ब्लास्ट के लिए इसलिए चुना गया, क्योंकि यहां मुस्लिमों की बड़ी आबादी है। बता दें कि इस केस में साध्वी प्रज्ञा, पुरोहित और स्वामी दयानंद पांडे मुख्य आरोपी थे।
– एटीएस ने 4000 पेज की चार्ज शीट में आरोप लगाया गया था कि मालेगांव को ब्लास्ट के लिए इसलिए चुना गया, क्योंकि यहां मुस्लिमों की बड़ी आबादी है। बता दें कि इस केस में साध्वी प्रज्ञा, पुरोहित और स्वामी दयानंद पांडे मुख्य आरोपी थे।
क्या है मामला?
– बता दें कि 29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में बम ब्लास्ट हुआ था। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी, करीब 100 लोग जख्मी हुए थे। ब्लास्ट
उस वक्त किए गए थे, जब लोग रमजान के दौरान नमाज पढ़ने जा रहे थे। इन ब्लास्ट के पीछे हिंदू राइट विंग ग्रुप्स से जुड़े लोगों का हाथ होने की बात सामने आई थी।





