मालगाड़ी में पंजाब से कश्मीर पहुंची 1,382 एमटी चावल की दूसरी खेप

पंजाब से कश्मीर के लिए एफसीआई ने 1,382 मीट्रिक टन चावल की दूसरी खेप रेल मार्ग से अनंतनाग पहुंचाई, जिससे खाद्यान्न की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई। रेल परिवहन से समय की बचत हुई और सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होकर दूरदराज इलाकों तक समय पर वितरण संभव हुआ।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने रेलवे के माध्यम से पंजाब से कश्मीर के लिए 1,382 मीट्रिक टन चावल की दूसरी खेप भेजी है। इससे पहले एफसीआई ने दिसंबर में 21 कवर वैगनों में 1,384 टन खाद्यान्न भेजा था। यह मालवाहक ट्रेन वीरवार दोपहर को अनंतनाग के गुड्स टर्मिनल में पहुंची। यहां माल को उतारा गया है।

रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि रेल मार्ग से आवश्यक खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह खेप भेजी गई है। इससे क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत निर्बाध आपूर्ति बनी रहेगी। रेल से परिवहन से न समय की बचत होने के साथ ही सड़क मार्ग पर निर्भरता कम हुई है।

एफसीआई के अधिकारियों ने बताया कि आगामी दिनों में और खेपें भेजे जाने की संभावना है। इससे कश्मीर में खाद्यान्न की उपलब्धता स्थिर बनी रहेगी और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न होगी। इससे पहले 21 दिसंबर 2025 को पंजाब के फिरोजपुर डिवीजन से एफसीआई की खाद्यान्न मालगाड़ी अनंतनाग पहुंची थी।

एफसीआई के डिविजनल मैनेजर केएन मीणा ने मालगाड़ी का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के बार-बार बंद होने के कारण पहले खाद्यान्न आपूर्ति में कई समस्याएं आती थीं लेकिन अब रेल सेवा से इस चुनौती का समाधान किया है। यह पहल कश्मीर के दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो रही है। इससे उपभोक्ताओं और किसानों दोनों को लाभ मिल रहा है।

पंजाब व घाटी के बीच आर्थिक सेतु बनी मालगाड़ी
अधिकारियों ने बताया कि चावल से भरी मालगाड़ी बिना किसी बाधा व सड़क परिवहन के मुकाबले बहुत ही कम समय में दूसरी बार पंजाब से कश्मीर पहुंची हैं। यह रेलवे के लिए गर्व का क्षण है। यह मालगाड़ी पंजाब और कश्मीर के बीच आर्थिक सेतु का काम करेगी। आने वाले समय में रेलवे की ओर से एफसीआई की खाद्यान्न मालगाड़ियों का संचालन अर्थव्यवस्था को आधारभूत संरचना देने में प्रमुख भूमिका निभाएगा। इससे सड़क परिवहन की तुलना में माल और खाघान्न की आवाजाही में कम समय लगता है। साथ ही इस पहल से ही भीड़भाड़ वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 44 में यातायात का दवाब कम होगा।

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