मानसून की हो गई विदाई, देश का 21 फीसदी से भी अधिक भारत रहा सूखा

पुणे: देश में मानसून की लगभग विदाई हो गई है, पर देश का 21 फीसदी से भी अधिक हिस्सा सूखा पड़ा है। भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल मॉनसून ने देश का 21.38 प्रतिशत हिस्सा थोड़े सूखे से बहुत ज्यादा सूखे के बीच छोड़ दिया है। विभाग के सूखे को मापने के इंडेक्स से पता चलता है कि इस साल मॉनसून में सूखे की स्थिति साल 2016 और 2017 से भी खराब रही है। इस साल करीब 134 जिलों में थोड़ा सूखे से बहुत ज्यादा सूखे हालात रहे हैं।
यह इंडेक्स सूखे के लिए निगेटिव और नमी वाली स्थितियों के लिए पॉजिटिव होता है। इसके मुताबिक करीब 229 जिलों में हल्की सूखी स्थिति रही जो कि इस मॉनसून का 43.51 प्रतिशत है। पिछले साल देश का करीब 17.78 प्रतिशत क्षेत्र थोड़े सूखे से बहुत सूखे के बीच रहा था जबकि 2016 में यह 12.28 प्रतिशत था। मौसम विभाग में डेटा मैनेजमेंट हेड पलक गुहाठाकुर्ता ने बताया कि इस मॉनसून में सूखे की स्थिति वाले इलाके का प्रतिशत 21 प्रतिशत से अधिक रहा जिसमें से 5.45 प्रतिशत क्षेत्र में गंभीर सूखा और 2.08 प्रतिशत क्षेत्र में काफी सूखा रहा।
विभाग के डेटा में लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, बिहार, राजस्थान और कर्नाटक के जिलों में गंभीर सूखे से लेकर काफी सूखे तक कि स्थिति देखी जा सकती है। महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के भी कुछ जिलों में सूखा रहा। इनमें सतारा, सोलापुर, औरंगाबाद, जालना, बुलढ़ाना और कई जिले रहे। सूखे की सबसे खराब स्थिति लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, मेघालय, त्रिपुरा और झारखंड में रही है। महाराष्ट्र में सूखे का इंडेक्स-1.42 रहा जो गंभीर रूप से सूखा बताता है।





