मध्य प्रदेश में कड़कड़ाती ठंड और कोहरे ने बढ़ाई खतरनाक स्थिति

उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी का असर अब मध्यप्रदेश में भी साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में शीतलहर का जबरदस्त प्रकोप जारी है। पिछले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में करीब 7 डिग्री की भारी गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को भोपाल का न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।

हालांकि स्कूलों का समय सुबह 9:30 बजे कर दिया गया है, लेकिन स्कूल बसें अब भी सुबह 7 बजे स्टॉप पर पहुंच रही हैं। इसके चलते बच्चों को सुबह 6 बजे से ही ठंड में उठकर स्कूल जाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं, मंगलवार से प्री-बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जिससे छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है।

10 साल में दूसरी बार इतनी कड़ाके की ठंड

बीते एक दशक में यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब भोपाल में इतनी भीषण सर्दी देखने को मिल रही है। इससे पहले 8 जनवरी 2025 को न्यूनतम तापमान 3.6 डिग्री तक गिर गया था।

जेट स्ट्रीम और बर्फबारी बनी सर्दी की वजह

मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ों पर लगातार हो रही बर्फबारी और सक्रिय जेट स्ट्रीम के कारण प्रदेश में कड़कड़ाती ठंड महसूस की जा रही है। राहत की बात यह है कि बुधवार से तापमान में हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।

स्कूल छुट्टियों को लेकर असमंजस

ठंड को देखते हुए इंदौर समेत कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है, लेकिन भोपाल में अब तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे अभिभावकों में नाराज़गी बढ़ रही है। अभिभावक प्रशासन से छोटे बच्चों के लिए अवकाश या स्कूल बसों की टाइमिंग में सख्त बदलाव की मांग कर रहे हैं।

कोहरा, विजिबिलिटी और तापमान का हाल

मंगलवार सुबह 8 बजे तक हल्का कोहरा छाया रहा। विजिबिलिटी घटकर 500 मीटर तक पहुंच गई। दिन में धूप निकलने से अधिकतम तापमान 21.2 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक रहा, लेकिन शाम होते ही सर्दी फिर बढ़ गई। न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री कम दर्ज होने से शीतलहर की स्थिति बनी रही।

कोहरे से बढ़े सड़क हादसे

घने कोहरे के कारण प्रदेश में सड़क हादसे भी बढ़ गए हैं।

उज्जैन में वाहन टकराने से 3 लोगों की मौत

रीवा में विजिबिलिटी कम होने से एक वाहन नहर में जा गिरा

फसलों पर भी मंडरा रहा खतरा

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्य से अधिक ठंड और लगातार बनी आर्द्रता के कारण प्रदेश के कई जिलों में चना फसल पर कॉलर रॉट रोग का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button