मंडियों में दोहरी शुल्क व्यवस्था लागू होने से व्यापारी परेशान, नही सुन रही सरकार

कानपुर। सूबे की कृषि उत्पादन मंडी समितियों में दोहरी व्यवस्था लागू होने से व्यापारी परेशान हैं। व्यापारियों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ने मंडी शुल्क समाप्त करने की व्यवस्था लागू कर दी है तो प्रदेश की मंडियों के अंदर भी समाप्त करने के लिए शासनादेश जारी होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने पूरे देश में ‘कृषक उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन एवं सुविधा) अध्यादेश २०२०’ को लागू किया है। 9 जून को लागू किए गए इस आदेश को 6 जून से लागू माना गया। इस अध्यादेश के तहत उत्तर प्रदेश में मंडियों के बाहर मंडी शुल्क समाप्त हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक समाप्त नहीं किया है, जिसके चलते मंडी समिति परिसर के अंदर काम करने वालों को दो फीसद मंडी शुल्क अदा करना पड़ता है।
मंडियों के अंदर अलग और बाहर अलग व्यवस्था होने से मंडियों के अंदर का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने मंडी शुल्क की पूर्णतया समाप्ति को लेकर धरना-प्रदर्शन ही नहीं किया बल्कि मंडी समिति के अधिकारियों और कैबिनेट मंत्री सतीश महाना को भी ज्ञापन सौंपा, किंतु अभी तक प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। इस अध्यादेश के उत्तर प्रदेश में लागू होने के उपरांत उत्तर प्रदेश में गल्ला मंडियों व सब्ज़ी मंडियों के बाहर कृषि उत्पाद की खरीद बिक्री होने पर कोई मंडी शुल्क नही लगेगा और न ही मंडी समितियों के कई कागजातों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा । यहां तक कि मंडियों के बाहर कृषि उत्पादों की खरीद बिक्री के लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की ज़रूरत नही होगी। इस अध्यादेश के लागू होने के उपरांत कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम से संचालित मंडी शुल्क या यूज़र चार्ज लेने वाली प्रदेश की गल्ला व सब्ज़ी मंडियों में कृषि उत्पादों की आवक में भारी कमी आना शुरू हो गया है। यहां तक कि इन दोनों मंडियों की आवक बिल्कुल समाप्त हो रही है
कानपुर गल्ला आढ़तिया संघ के प्रधानमंत्री ज्ञानेश मिश्रा का कहना है कि बाहर मंडी शुल्क समाप्त होने व मंडियों के अंदर शुल्क लागू रहने से गल्ला व सब्ज़ी मंडियों में कारोबार न के बराबर रह गया। सरकार को इस दोहरी व्यवस्था को तुरंत समाप्त करना चाहिए, ताकि व्यापार को बचाया जा सके। व्यापारियों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
इसी तरह कानपुर आलू आढ़ती संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरी शंकर गुप्ता का कहना है कि मंडियों में मंडी शुल्क लागू रहने से चकरपुर सब्ज़ी मंडी का व्यापार समाप्त हो रहा है । मंडी शुल्क को पूरी तरह से समाप्त करना चाहिए, ऐसा न होने से मंडी के अंदर के व्यापारी बुरी तरह से परेशान हैं जबकि मंडी के बाहर ही कोई शुल्क न लगने से खुलेआम लोग काम कर रहे हैं।
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