भूलकर भी ये लोग न देखें जलती हुई होलिका

हिंदू धर्म में होलिका दहन का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई थी और होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई थी। होलिका की अग्नि नकारात्मकता को समाप्त करने वाली मानी जाती है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ लोगों के लिए जलती हुई होलिका को देखना वर्जित बताया गया है।
ऐसी मान्यता है कि इन नियमों की अनदेखी करने से व्यक्ति को भारी कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं किन लोगों को होलिका दहन की अग्नि से दूर रहना चाहिए?
नवविवाहित महिलाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन महिलाओं की शादी के बाद पहली होली है, उन्हें जलती हुई होलिका देखने की मनाही होती है। ऐसी मान्यता है कि नवविवाहिता द्वारा इसे देखना उसके वैवाहिक जीवन में कलह व दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। कुछ क्षेत्रों में होलिका की अग्नि सास और बहू को भी साथ में जलते हुए नहीं देखना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं
गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की अग्नि से दूरी बनाए रखनी चाहिए। इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण हैं। शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन के समय नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं, जो गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से, होलिका की भारी गर्मी और उससे निकलने वाला धुआं मां और बच्चे के सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
नवजात शिशु
छोटे बच्चों को होलिका दहन स्थल पर ले जाना वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर होलिका जलती है, वहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बहुत ज्यादा होता है। छोटे बच्चों पर इन ऊर्जा का असर न पड़े। इसलिए इन्हें होलिका दहन पूजन में शामिल होने से बचना चाहिए।
होलिका दहन से जुड़े अन्य नियम
होलिका की अग्नि पवित्र मानी जाती है, इसमें प्लास्टिक, चमड़ा या कचरा न डालें। केवल गोबर के उपले, सूखी लकड़ी और कपूर का प्रयोग करें।
होलिका दहन के बाद अगले दिन सुबह उसकी राख को घर लाकर माथे पर लगाना और घर के चारों कोनों में छिड़कना बहुत शुभ माना जाता है। इससे वास्तु दोष दूर होता है।
इस दिन तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए।





