भारत में आई कारों की मांग में गिरावट, सामने आई ये बड़ी वजह…

सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी समेत चार सबसे बड़ी आटोमोबाइल कंपनियों ने कहा है कि पिछली मई के मुकाबले इस मई में ऑटो सेल्स में 20 फीसदी की गिरावट आई है. ऐसा अर्थव्यवस्था में गिरावट के कारण हुआ है.
मई में ऑटो इंडस्ट्री की होल सेल बिक्री में भी भारी गिरावट आई है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि बाजार में मांग की कमी है और स्टॉक भरे हैं.
कार बाजार की लीडर कही जाने वाली मारुति सुजुकी कंपनी ने मई, 2019 में गिरावट की घोषणा की है. कंपनी के उत्पाद सुपर चेरी मालवाहक को छोड़कर, सियाज, ब्रेजा आदि सभी वाहनों की बिक्री में निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई है.
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मारुति सुजुकी ने मई, 2019 में बिक्री में 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की है. कंपनी ने मई, 2019 में कुल 134,641 गाड़ियां बेचीं. पिछले साल यानी मई, 2018 में इसने 172,512 गाड़ियां बेची थीं. कंपनी की पिछली सबसे कम बिक्री 2015 में हुई थी. इस साल उससे भी कम बिक्री हुई.
मारुति की कुल घरेलू बिक्री में 23.1 फीसदी की गिरावट आई है. पिछले मई में यह 1.63 लाख यूनिट थी, जबकि इस साल 1.25 है.
इसी तरह दूसरी कंपनी महिंद्रा & महिंद्रा में भी मई महीने में टोटल ऑटो सेल्स में 3 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. पिछले साल मई में इसने 46,848 वाहन बेचे थे, जबकि मई 2019 में यह बिक्री 45,421 वाहनों की रही.
ऑटोमोबाइल सेक्टर के अध्यक्ष राजन वढेरा ने कहा, ‘हालांकि, उपभोक्ताओं का उत्साह और मांग चुनाव के पहले तक बना हुआ था, लेकिन हमारा फोकस स्टाक को ठीक करने पर था.’
मारुति, महिंद्रा, टाटा और होंडा समेत कार निर्माताओं ने मई 2019 में सामूहिक रूप से कुल 229,294 वाहन बेचे. यह पिछली मई की तुलना में 20 फीसदी कम है.
यह मंदी सिर्फ कारों की बिक्री में नहीं आई है. ट्रैक्टर की भी मांग उम्मीद से कम रही. सबसे बड़े ट्रैक्टर निर्माताओं में से एक महिंद्रा की बिक्री का आंकड़ा कहता है कि ट्रैक्टर की घरेलू बिक्री में मई में 17 फीसदी की गिरावट आई है. पिछले साल मई में इसने 28,199 ट्रैक्टर बेचा था, जबकि इस साल मई में 23,539 ही बिके.
टाटा मोटर की हालत भी इससे अलग नहीं है. टाटा ने अपने घरेलू बाजार में हुई बिक्री में 26 फीसदी की गिरावट दर्ज की है. टाटा ने मई, 2018 में 54,290 वाहने बेचे थे, जबकि मई, 2019 में 40,155 वाहनों की बिक्री हुई.
जापानी आटोमोबाइल कंपनी टोयोटा ने भी इस साल मई में 12,138 वाहन बेचे जो कि पिछले साल मई की तुलना में 7.4 फीसदी की गिरावट है.
यह गिरावट सभी तरह के वाहनों की बिक्री में आई है. दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी 5 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि कमर्शियल और यात्री वाहनों की बिक्री में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
कार बाजार शहरी आय और रोजगार पर टिका है. कार बाजार में गिरावट यह संकेत है कि नौकरियों और लोन फाइनेंस मार्केट संकट में है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था में आ रही मंदी का संकेत हो सकता है.
कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के सीईओ राजीव सिंह ने कहा, “इसकी बहुत सी वजहें हैं. पहला तो व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था में मंदी आई है. दूसरा, आटो सेल्स क्रेडिट की उपलब्धता पर निर्भर करता है और क्रेडिट क्रंच बढ़ा हुआ है.”
2015 से लेकर 2018 में मध्य तक तेजी को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना था कि भारत जल्दी ही जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा बड़ा मोटर मार्केट बन जाएगा.
भारत में अनपेक्षित रूप से उपभोक्ता मांगों में गिरावट आई है, इसके चलते उत्पादों के स्टॉक इकट्ठा होने लगे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि जल्दी ही स्टॉक समस्या से छुटकारा मिलेगा और मार्केट में मांग बढ़ेगी.





