भारत ने वेनेजुएला में अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी

भारत ने शनिवार रात अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि वह वेनेजुएला की यात्रा करने से बचें। यह एडवाइजरी अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के कारण उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर जारी की गई है।

विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला में मौजूद सभी भारतीयों से अत्यधिक सतर्कता बरतने और अपनी गतिविधियों को सीमित करने का अनुरोध किया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम के मद्देनजर भारतीय नागरिकों को वेनेजुएला की सभी गैर-आवश्यक यात्रा से बचने की सख्त सलाह दी जाती है। जो सभी भारतीय वेनेजुएला में किसी भी कारण से हैं, उन्हें अत्यधिक सतर्कता बरतने, अपनी गतिविधियों को सीमित करने और काराकास में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है।

मंत्रालय ने भारतीयों से दूतावास से संपर्क करने का अनुरोध किया है। वेनेजुएला में लगभग 50 गैर-निवासी भारतीय और 30 भारतीय मूल के व्यक्ति हैं।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो कभी बस ड्राइवर थे

23 नवंबर 1962 को जन्मे वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो श्रम संघ के नेता के बेटे हैं और कभी बस ड्राइवर के तौर पर अपना जीवन यापन करते थे। 1992 में तत्कालीन सैन्य अधिकारी ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में उन्होंने राजनीति में पदार्पण किया और शावेज के करीबी बन गए। 1998 में शावेज के नेतृत्व में उन्होंने चुनाव भी लड़ा।

शावेद के शासनकाल में मादुरो नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और विदेश मंत्री भी बने। विदेश मंत्री रहने के दौरान मादुरो ने वेनेजुएला के तेल कारोबार को पूरी दुनिया में फैलाया। शावेज ने अपने निधन से पहले मादुरो को अपना उत्तराधिकारी चुना और 2013 में शावेज के निधन के बाद मादुरो ने चुनाव जीता और वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने।

वेनेजुएला में महंगाई चरम पर

मादुरो के शासनकाल में देश भारी आर्थिक संकट में घिर गया और महंगाई चरम पर पहुंच गई। मादुरो के शासनकाल को चुनावों में धांधली, खाद्य संकट और अधिकारों के हनन के लिए जाना जाता है।उन्होंने 2014 और 2017 में सरकार के खिलाफ आंदोलनों को बेरहमी से कुचला। जनवरी 2025 में हुए राष्ट्रीय चुनाव में वह तीसरी बार देश के राष्ट्रपति चुने गए।

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