बोरवेल में गिरे दो साल के फतेहवीर सिंह की मौत का मामला पहुंच गया HC, जानें क्या है ट्यूबवेल व बोरवेल लगाने का नियम

जिले के भगवानपुरा गांव में बोरवेल में गिरे दो साल के बच्चे फतेहवीर सिंह की मौत का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। इसको लेकर एक वकील ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच इस पर अगले सोमवार को सुनवाई करेगी। इसमें है कि बोरवेल व ट्यूूबवेल लगाने के नियमों के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया है कि इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
फतेहवीर की मौत पर प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर लोग, संगरूर बंद
दूसरी ओर बच्चे की मौत पर भड़का लाेगों का गुस्सा शांत नहीं हाे रहा है। बुधवार को भी लोग सड़कों पर उतर आए। विभिन्न संगठनों के सदस्य व लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। आज संगरूर बंद रखा गया है। शहर में दुकानें व बाजार बंद हैं। प्रदर्शनकारी बच्चे की मौत के लिए जिला प्रशासन के अफसरों और जिला उपायुक्त पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। वे डीसी और अन्य अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

हाई कोर्ट साेमवार को जनहित याचिका पर करेगा सुनवाई
वकील परविंदर सेखों ने फतेहबीर के बोरवेल में गिरने से मौत को लेकर हाई कोर्ट में बुधवार को जनहित याचिका दायर की। याचिका में फतेह के रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी देते हुए पूरे मामले की जांच कराने का निर्देश जारी करने की अपील गई है। हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच याचिका पर सुनवाई करेगी।
याचिका में कहा गया है कि यह मामला पूर्ण तौर पर लापरवाही का है। अगर स्थानीय प्रशासन नियमों के अनुसार और समझदारी से काम करता तो बच्चे बोरवेल में नहीं गिरता। बच्चे को बचाने के लिए भी सही ढंग से काम नहीं किया गया। इसलिए इस मामले की सही जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और बच्चे के परिवार को उचित मुआवजा भी दिया जाए।
बोरवेल व ट्यूूबवेल लगाने के ये हैं नियम, लेकिन नहीं हो रहा पालन
याचिका में बताया गया है कि कि बोरवेल के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्देश जारी किए थे। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में बोरवेल व ट्यूबवेल लगाने व इसके लिए खोदाई के कार्य की निगरानी संबंधित गांव पंचायत के सरपंच व कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए। शहरी क्षेत्र में यह कार्य भू-जल विभाग तथा जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता व अभियंता तथा नगर परिषद द्वारा किया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश में बोरवेल व ट्यूबवेल लगाने वाले को अपने क्षेत्र में लगाए बोरवेल एवं टयूब्वेल के समीप सूचना पट्टी भी लगवाना अनिवार्य है। इस सूचना पट्टी पर बोरवेल की खुदाई करने वाली एजेंसी, उसका पूरा पता, बोरवेल व ट्यूबवेल के उपयोग कर्त्ता एवं इसके मालिक का नाम व पता आदि भी लिखवाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त कुएं की खुदाई करने वाली एजेंसी का जिला प्रशासन के पास पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।
संगरूर सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन
दूसरी ओर, बच्चे की मौत के बाद संगरूर व अन्य जगहों पर बुधवार को भी प्रदर्शन जारी रहा। संगरूर में जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी, तर्कशील सोसायटी सहित दर्जनों संगठनों द्वारा मुक्कमल संगरूर बंद के आह्वान तहत शहर बंद करवाया गया। स्थानीय महावीर चौक में जमा हुए संगठनों के प्रतिनिधियों ने शहर में मोटरसाइकिल मार्च निकाला व सीधे डिप्टी कमिश्नर की कोठी केसमक्ष पहुंचे। उन्होंने डीसी के आवास के बाहर जमकर नारेबाजी की।
बार एसोसिएशन की तरफ वकील दलवीर सिंह सेखों ने समूह वकीलों द्वारा बंद को समर्थन देने का एलान किया। उन्होंने 2 जुलाई को कोर्ट खुलते ही डीसी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने व बच्चे को बचाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन की उच्च स्तरीय जांच करने के प्रयास का एलान किया। लोगों ने शहर के बाजार, पेट्रोल पंप इत्यदि बंद करवाए गए। बस सर्विस व मेडिकल सुविधा बिना किसी रुकावट के जारी है। भारी पुलिस बल डीसी कोठी व दफ्तर पर तैनात कर दी गई है।
बता दें कि जिले के सुनाम के नजदीकी गांव भगवानपुरा में 140 फीट गहरे दस वर्ष पुराने बोरवेल में गिरे दो वर्षीय बच्चे फतेहवीर सिंह को नहीं बचाया जा सका था। पिछले वीरवार शाम बोरवेल में गिरे बच्चे को मंगलवार सुबह करीब सवा पांच बजे 109 घंटे के बाद बाेरवेल से निकाला गया। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे को बाेरवेल से निकालने के बाद तुरंत एंबुलेंस से डीएमसी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे चंडीगढ़ पीजीआइ रेफर कर दिया गया। पीजीआइ में बच्चे काे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद शव को हेलीकॉप्टर से सुनाम लाया गया, जहां गांव शेरों के शमशानघाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम क्रिया दौरान भारी संख्या में लोग उमड़े। दूसरी ओर बच्चे की मां अब भी बेसुध है और परिवार का भी बुरा हाल है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक फतेहवीर की मौत कुछ दिन पहले ही हो गई थी। पीजीआइ की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जब बच्चे को लाया गया उसकी नाड़ी नहीं चल रही थी। हार्ट में कोई गतिविधि नहीं थी, इसलिए बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया था। पुलिस के कहने पर पोस्टमार्टम किया गया।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पैनल में डॉ. वाईएस बंसल और डॉ सेंथिल कुमार थे। पोस्टमॉर्टम सुबह 11.15 बजे पूरा हुआ। बच्चे को सुबह 7.25 बजे पेडियाट्रिक इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। शुरूआती निष्कर्ष यही है कि मौत कुछ दिनों पहले हुई है। डिटेल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट जांच अधिकारी को सौंप दी जाएगी।
फूटा लोगों का गुस्सा, पीजीआइ में किया प्रदर्शन, संगरूर में भी सड़कों पर उतरे लोग
दूसरी ओर, बच्चे की मौत के बाद मंगलवार को लोगों का सरकार और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। चंडीगढ़ पीजीआइ में काफी संख्या में लोग पहुंचे और प्रदर्शन किया। लोगों के विरोध को देखते हुए पोस्टमार्स्टम हाउस के बाहर कड़ी सुरक्षा की गई थी।

लोगों ने मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आप नेता हरपाल चीमा पहुंचे तो किया विरोध, लोग बोले-पांच दिन से कहां थे, अब राजनीति चमकाने आ गए
पीजीआइ में शिरोमणि अकाली दल के नेता परमिंदर सिंह ढींढसा सहित कई नेता पहुंचे। आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा भी वहां पहुंचे। उनका लोगों ने काफी विरोध किया और वहां से जाने काे कहा। लोगों ने चीमा के खिलाफ नारेबाजी की और चीमा से पूछा कि पिछले पांच दिनों से तो नजर नहीं आए और अब राजनीति चमकाने आ गए। लोगों ने चीमा वापस जाओ के नारे लगाए।

उधर, लोगों का प्रशासन और पंजाब सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा है। गांव और संगरूर में भी लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और धरना दे रहे हैं। लाेगों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार की लापरवाही के कारण बच्चे को समय पर नहीं निकाला जा सका और उसकी जान चली गई। लोगों ने टेंट लगाकर धरना देना शुरू कर दिया है।
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ऐसे चला रैस्कयू ऑपरेशन
6 जून
4.30 बजे: फतेहवीर सिंह घर के सामने खेत में बने 140 फीट गहरे बोरवेल में गिरा। रात 10 बजे फतेह की एक बाजू में रस्सी की गांठ बांधी।
7 जून
7 बजे: 119 असॉल्ट इंजीनियरिंग रेजीमेंट की टीम मौके पर पहुंची। 9 बजे मशीन खराब हुई। मैनुअल खुदाई शुरू।
8 जून
10 बजे: टनल में सातवें पाइप डालने का काम शुरू हुआ। रात तक 11 सीमेंट की पाइपें डालीं।
9 जून
सुबह 3 बजे: पाइप डालने में रुकावट, दोपहर 12 बजे तक काम रुका। रात 12 बजे गलत दिशा में खुदाई का पता चला।
10 जून
सुबह 9 बजे: लोगों ने चक्का जाम किया। 3 बजे फिर 119 असॉल्ट इंजीनियरिंग रेजीमेंट पहुंची। 7.30 बजे चौपर वापस लौटा। कैबिनेट मंत्रियों की बैठक।
11 जून
सुबह 4.30 बजे: गुरिंदर ने फतेहवीर के चारों तरफ फंसी बोरी को हटाया। सवा पांच बजे फतेहवीर को निकाला गया। 7.35 पर पीजीआइ चंडीगढ़ में मृत घोषित।
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ये कदम उठाते तो बच सकता का मासूम
1. बच्चे की उम्र महज दो साल थी, इसलिए रैपिड ऑपरेशन करना चाहिए था। रेस्क्यू के लिए समय का सही आकलन जरूरी था।
2. बोरवेल से सबमर्सिबल पंप निकालने में माहिर गुरिंदर सिंह की मदद शुरुआत में ली जानी चाहिए थी।
3. एनडीआरएफ के लिए यह पहला बड़ा ऑपरेशन था, इसलिए अधिक प्रशिक्षित लोगों की टीम बुलानी चाहिए थी।
4. बार-बार गलतियों व मशीन खराब होने से ऑपरेशन बाधित हुआ। आधुनिक मशीनें व नेवीगेटर का इस्तेमाल करना चाहिए था।





