बुधवार से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, शुभ कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक

पूर्वजों के सम्मान का पर्व पितृपक्ष शहर अंचल में श्रद्धा और उत्साह के साथ कल से मनाया जाएगा। घरों में विधि- विधान से पूर्वजों का आह‌वान कर भोग लगाने के बाद पूर्वजों का आह्वान किया जाएगा। पूरे 15 दिनों तक पूर्वजों के सम्मान में लगभग हर घर में इष्टदेव और पूर्वजों को भोग को अर्पित पूजा -अर्चना की जाएगी।

शास्त्रों के अनुसार, साल के 15 दिनों को पितरों के लिए सुरक्षित किया गया है। इस दिन घर के बड़े -बुजुर्ग पितृ पक्ष भर स्वर्गीय हो चुके बुजुर्ग का श्राद्ध करते हैं। ऐसी मान्यता है कि साल के इन 15 दिनों में स्वर्गवासी हो चुके पितर अपने मृत्यु के तिथि के अनुसार इस संसार में आते हैं। इसलिए प्रत्येक परिवार वालों द्वारा अपने मृत्यु पितरों का श्राद्ध किया जाता है। पूजा-अर्चना करने के बाद पकवान व भोजन का भोग लगाया जाता है।
विद्व विद्वत परिषद के मीडिया प्रभारी पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मानव के ऊपर तीन ऋृण होते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में पितरों को जल अर्पण करने से उनकी आत्माओं को तृप्ति मिलती है। पितृ ऋृण का विशेष महत्व है। पितृ ऋृण के रूप में ही पितरों का श्राद्ध किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में शुभ कार्य वर्जित है। इसी कारण पखवाड़ेभर तक शुभ कार्यों पर ब्रेक लगा रहेगा।
तोरई का भाव चढ़ा
पूर्वजों के पूजन में तोरई के पत्तों, सब्जी व उड़द दाल का विशेष महत्व है। इसके चलते इन सामानों की मांग एकाएक बढ़ जाती है। शहर के गोलबाजार व इतवारी बाजार में तोरई का भाव 30 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। सब्जी विक्रेता पार्वती सोनकर ने बताया कि थोक बाजार में यह 80 रुपये किलो तक बिका है। मांग बढ़ने के कारण इस सब्जी का भाव बढ़ा हुआ है। पखवाड़ेभर तक रेट इसी तरह रहेगा।
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