बाबा रामदेव यहां से खरीदेंगे ऐलोवेरा, ऐसी है इस किसान की कहानी

जींद। आज जहां खेती के मायने बदलते जा रहे हैं, वहीं ऐलोवेरा की खेती अपने आप में एक मिसाल बन चुकी है। बहुत ही कम खर्च से किसान लाखों कमा सकते हैं। इसी तरह जींद में भी खेती करने का शौक रखने वाले एक व्यक्ति के दिन बदलने वाले हैं। आने वाले समय में आप योग गुरू बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड का जो भी ऐलोवेरा प्रोडक्ट खरीदेंगे, उसके लिए ऐलोवेरा इसी खेत से सप्लाई होगा। साढ़े 8 एकड़ जमीन पट्‌टे पर लेकर लगाया ऐलोवेरा…
बाबा रामदेव यहां से खरीदेंगे ऐलोवेरा, ऐसी है इस किसान की कहानी
 
– जींद जिले के गांव अशरफगढ़ के सोनू पांचाल 12वीं पास हैं। उन्होंने गांव के पास ही साढ़े 8 एकड़ जमीन इसलिए पट्‌टे पर ली है कि खेती का शौक है, लेकिन उनके पास जमीन नहीं है। बावजूद इसके उन्होंने कई साल पहले बागवानी विभाग से ऐलोवेरा की खेती ट्रेनिंग ली थी।
– इसके बाद प्रदेशभर में किसानों को ऐलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित किया। कैसे लगाया जाए और देखरेख की जाए। कहां इसे बेचा जा सकता है। इसके बारे में जानकारी दें। वह 100 से ज्यादा किसानों को ऐलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
बागवानी विभान ने फ्री में लगाया क्लोन सफेदा
– इस बार सोनू को गांव के पास में ही साढ़े 8 एकड़ जमीन मिल गई, जिसे उसने पट्‌टे पर लेकर पूरे खेत एेलोवेरा लगाने का फैसला लिया। इसके लिए उसने पहले वन विभाग से संपर्क किया और विभाग ने फ्री में साढ़े आठ 8 एकड़ में क्लोन सफेदा के 413 पौधे लगा दिए।
– सोनू ने बताया उन्होंने अब पूरे खेत में एलोविरा लगाया है, जिस पर प्रति एकड़ 30 हजार रुपए खर्च आया है। बागवानी विभाग ने इस पर प्रति हैक्टयेर 17 हजार रुपए की सब्सिडी दी है।
 
कंपनियां खेत से लेकर जाएंगी ऐलाेवेरा
– सोनू पांचाल के मुताबिक पहले साल 8 से 10 महीने के बाद एेलोवेरा खेती पैदावार देनी शुरू कर देगी। इस दौरान प्रति एकड़ 150 क्विंटल तक की पैदावार हो सकती है। दूसरे साल इसकी पैदावार बढ़कर 450 क्विंटल तक प्रति एकड़ तक पहुंच जाएगी।
– इतना ही नहीं सोनू का अनुमान है कि तीसरे और आखिरी साल में ऐलोवेरा की पैदावार 900 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच जाएगी। एेलोवेरा प्लांट बड़ा होने के वजह से वह इसको बाजार में कई तरह से बेचेंगे।
– खेत में ही मशीन लगाकर जूस, जैल व शैंपू तैयार करके बेचे जाएंगे तो कच्चे माल के लिए सोनू पांचाल ने कई बड़ी कंपनियों, जिनमें बाबा रामदेव के सान्निध्य में चल रही पतंजलि भी शामिल है, ने सोनू पांचाल के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया है। ये कंपनियां खेत से ही कच्चे माल को लेकर जाएंगी।
 
परंपरागत खेती से कई गुना ले सकते हैं मुनाफा
– खास बात यह है कि एेलोविरा और क्लोन सफेदा लगाने के बाद तीन साल तक खेत में दूसरे फसल लगाने की जरूरत ही नहीं है। तीन साल मिलेगी एलोवेरा से आय, बागवानी विभाग सब्सिडी देता है।
– इस बारे में सोनू बताते हैं कि एेलोवेरा कम पानी में तैयार होनी वाली फसल है। एक साल में इसमें सिर्फ तीन पानी देने से ही काम चल सकता है। कोई दवा, खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ फसल में खरपतवार की रोकथाम करनी पड़ती है। इस दौरान किसान प्रति एकड़ परंपरागत फसलों से तीनों साल कई गुणा अधिक मुनाफा ले सकता है।
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