बाबा रामदेव का ‘पतंजलि पेट्रोल’?

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले कहते हैं- मुझे पेट्रोल-डीजल की कीमतों से परेशानी नहीं…मंत्री हूं, फोकट में मिलता है। मुझे परेशानी तब होगी, जब मेरी कुर्सी जाएगी। ऐसी सोच रखने वाले मंत्रियों से सजी मोदी सरकार पर अब उसके अजीज बाबा रामदेव ने हमला करके 35 से 40 रुपए प्रति लीटर में पेट्रोल-डीजल बेचने की बात कहकर सरकार को और परेशानी में डाल दिया है।
यूपी से बिहार तक और दिल्ली से महाराष्ट्र तक आज अगर किसी बात को लेकर सबसे ज्यादा हाहाकार है, तो वह है पेट्रोल-डीजल की कीमतें जो शतक लगाने के करीब हैं। तेल के बढ़ते दामों को लेकर सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं, जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं और मोदी सरकार बुरी तरह से हताश-परेशान है। सरकार को जवाब देते नहीं बन रहा है। लेकिन योग गुरु से पूरी तरह सफल बिजनेसमैन बन चुके बाबा रामदेव लोगों को फिर से एक नया सपना दिखा रहे हैं।
बाबा रामदेव ने नया शिगूफा छोड़ा है कि अगर सरकार उन्हें इजाजत दे और टैक्स में थोड़ी रियायत मिले, तो वह देश में 35 से 40 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल बेच सकते हैं। बाबा ने तेल के बढ़ते दामों को लेकर सरकार की आलोचना करने के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल को जीएसटी टैक्स स्लैब के न्यूनतम दर यानी 5 फीसदी की श्रेणी में रखे जाने की भी वकालत की। अब जरा फ्लैश बैक में चलते हैं।
आपको याद होगा यह वही बाबा रामदेव हैं, जिन्होंने 2014 में लोकसभा चुनाव के समय पूरे दमखम के साथ दावा किया था कि अगर केंद्र में मोदी की सरकार बनेगी, तो पेट्रोल 35 रुपए लीटर बिकेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि रसोई गैस सिलेंडर के दाम भी 200 रुपए हो जाएंगे। बड़बोले बाबा तो उस दौरान नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर रामराज्य आने तक की बात करने लगे थे। मोदी सरकार बनाने के लिए लोगों को दिवास्वप्न दिखाने वाले बाबा रामदेव का दरअसल अपना निजी स्वार्थ था। उनका मानना था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर उनकी कंपनी पतंजलि को टैक्स में रियायत मिल जाएगी और वह प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को पछाड़ देंगे। लेकिन बाबा की बार-बार गुहार के बावजूद ऐसा नहीं हो सका। इस पर बाबा अब बिदक गए हैं। तभी तो कभी नरेंद्र मोदी की जय-जयकार करने वाले रामदेव अब यहां तक कह रहे हैं कि अगर सरकार महंगाई रोकने में नाकाम रही, तो न सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनाव में, बल्कि उससे पहले होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी। रामदेव की मानें तो महंगाई की आग मोदी सरकार को भारी पड़ेगी।
दरअसल, धीरे-धीरे राजनीतिक हवा का रुख परखने में माहिर हो चुके रामदेव को भी शायद इस बात का अंदाजा हो गया है कि महंगाई को लेकर आम लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। तभी तो बाबा रामदेव अब यह खुलकर कह रहे हैं कि उन्होंने खुद को राजनीति से अलग कर लिया है। एक परफेक्ट बिजनेसमैन की मानिंद बाबा बड़ी बेतकल्लुफी से यह कहते हैं कि वह सभी पाॢटयों के हैं और स्वतंत्र हैं। कभी नरेंद्र मोदी और भाजपा की तारीफों में कसीदे कढऩे वाले बाबा आज खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 2014 में मोदी सरकार बनवाने के लिए जी-जान लगा देने वाले बाबा रामदेव का क्या मोदी सरकार से मोहभंग हो गया है? हालांकि 2014 में ही देश भर में घूम-घूमकर भाजपा का प्रचार करने वाले रामदेव ने उस समय ही यह साफ कह दिया था कि वह 2019 में भाजपा के लिए प्रचार नहीं करेंगे। तो इस बार के लोकसभा चुनाव में एक बात तो साफ है कि भाजपा को बाबा रामदेव का खुला साथ तो मिलने वाला नहीं है।
अनुलोम-विलोम वाले बाबा चित भी मेरी, पट भी मेरी वाली कहावत को लेकर चल रहे हैं। यही वजह है कि वह पूरी तरह से सरकार की खिलाफत करने से भी बच रहे हैं। इसी क्रम में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में वह यह कहने से नहीं चूके कि कई लोग मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ तो करते हैं, लेकिन अब उसमें सुधार की जरूरत है।
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बाबा रामदेव मानते हैं कि पेट्रोल-डीजल के दाम 35 से 40 रुपए हो सकते हैं, तो फिर वह सरकार पर इसके लिए दबाव क्यों नहीं बनाते? सिर्फ टीवी चैनल पर बयान देने और जनता की तालियां बटोरने से ही बाबा काम क्यों चला रहे हैं? पिछली यूपीए सरकार की तरह वह मोदी सरकार के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन क्यों नहीं कर रहे हैं? आपको याद होगा कि पिछली बार चुनाव से पहले किस तरह बाबा रामदेव ने कालाधन और भ्रष्टाचार को लेकर मनमोहन सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
अगर उन्हें महंगाई से त्रस्त जनता की मदद करनी है, तो खुलकर सामने आना ही होगा। हालांकि चुनाव से पहले मोदी सरकार को लेकर रामदेव का यह बयान काफी महत्व रखता है। अब देखना यह है कि भाजपा इस योग गुरु उर्फ बिजनेसमैन को अपने पाले में रखने के लिए उनकी नसीहत पर कितना अमल करती है। बहरहाल देश की जनता इस सियासी खेल का हिस्सा नहीं बनना चाहती…उन्हें तो बस महंगाई से राहत मिलनी चाहिए। हर मध्यमवर्गीय परिवार बाबा रामदेव से जानना चाहता है कि क्या सचमुच पेट्रोल-डीजल 40 रुपए लीटर में मिल सकते हैं। कहीं बाबा उनके साथ फिर से तो मजाक नहीं कर रहे हैं?





