बाढ़ का कहर: चारपाई पर बनाया किचन, छप्पर पर चढ़कर बचा रहे अपनी जिंदगी
यूपी के अवध क्षेत्र में बाढ़ से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। सीतापुर में घाघरा व शारदा नदियां उफान पर हैं। यहां की 87 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि अब खाना बनाने में भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। रेउसा के नगीनापुरवा में महिलाओं ने किसी तरह चारपाई पर ही चूल्हा जलाकर पेट की भूख मिटाई। वहीं, लोग बाढ़ से बचने के लिए छप्पर और घर की छतों पर शरण ले रहे हैं।

सीतापुर के रेउसा क्षेत्र में गांव में बाढ़ का पानी आ जाने से तख्त पर डरा सहमा बैठा परिवार।
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हालात ये है कि रास्तों पर भी घुटनों तक पानी भर गया है, लोग किसी तरह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे हैं।
चारपाई पर गैस चूल्हा रखकर खाना पकाती महिला।
उधर, बहराइच में सरयू और घाघरा नदियां उफान पर आ गई हैं। दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है। महसी केसरगंज और नानपारा क्षेत्र के 42 गांवों में घाघरा और सरयू का पानी घुस गया है। महसी में बाढ़ का पानी बेलहा-बेहरौली तटबंध पर भी थपेड़े ले रहा है। दो स्थानों पर तटबंध में भी रिसाव शुरू हो गया है। हड़कंप की स्थिति है। महसी में पीड़ित परिवार छप्पर और छतों पर शरण लेकर जिंदगी बचा रहे हैं।
महसी में बाढ़ के बाद पानी से शुक्लनपुरवा में घिरे मकान सुरक्षित स्थान की ओर जाते ग्रामीण।
छप्पर के नीचे व छतों पर शरण लिए ग्रामीण।
बहराइच के भगवानपुर में खेतों में भरा पानी।
जबकि गोंडा में घाघरा खतरे के निशान से 51 सेमी. ऊपर पहुंच गई है। शनिवार को जिले के 16 नए गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया।
इसके अलावा फैजाबाद में सरयू नदी खतरे के निशाना से एक सेमी ऊपर बह रही है। (बाढ़ के पानी में जलमग्न फसलें।)





