पड़ोसी राज्य केनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई तीन बाघों की मौत, अफसरों ने जारी किया अलर्ट…

बाघों की सुरक्षा को लेकर मध्य प्रदेश के वन अफसर कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में केनाइन डिस्टेंपर वायरस से तीन बाघों की मौत हो गई और प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन डॉ. यू. प्रकाशम् को पता ही नहीं है। जब वायरस से मप्र के बाघों के बचाव को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे आश्चर्य से बोले-मुझे जानकारी नहीं है। ये हाल तब हैं, जब विश्व टाइगर-डे कार्यक्रम में टाइगर स्टेट का दर्जा मिलने पर वन अफसरों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि अब बाघों की सुरक्षा को लेकर हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हालांकि वनमंत्री उमंग सिंघार का कहना है कि हमने अलर्ट जारी किया है।
अफसरों को विशेष अहतियात बरतने के निर्देश दिए
राजस्थान के हालात को लेकर जब वनमंत्री उमंग सिंघार से बात की तो उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाघों की सुरक्षा को लेकर कोताही नहीं बरती जा सकती। राजस्थान की सीमा से सटे संरक्षित क्षेत्र और जिलों के अफसरों को अलर्ट कर दिया गया है। उन्हें विशेष अहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि कोई भी संदिग्ध मामला सामने आते ही मुख्यालय को सूचना दें।
वायरस के कारण चंद घंटों में बाघ की मौत हो जाती है
पड़ोसी राज्य राजस्थान के बायोलॉजिकल पार्क में पिछले आठ दिनों में एक सफेद सहित तीन बाघों की मौत हो गई है। मौत का कारण केनाइन डिस्टेंपर वायरस बताया जा रहा है। यह वायरस महामारी की तरह तेजी से फैलता है और इससे चंद घंटों में बाघ या अन्य मांसाहारी वन्यप्राणी की मौत हो जाती है।
वर्ष 2018 में इसी वायरस से गुजरात के गिर अभयारण्य में महज दो माह में 23 बब्बर शेरों की मौत हुई थी। इन परिस्थितियों को जानते हुए भी मप्र के वन अधिकारी गंभीर नहीं हैं। जबकि संकट दरवाजे पर खड़ा है। हालांकि प्रदेश में इस वायरस से बचाव के लिए बाघों को एंटी डोज दिया जाता रहा है, लेकिन एंटी डोज सिर्फ चिड़ियाघरों के बाघों को दिया जाता है। खुले जंगलों में घूम रहे बाघों को डोज देना मुश्किल है और ये ही वायरस को आगे बढ़ाते हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में छह टाइगर रिजर्व, चार नेशनल पार्क और 25 अभयारण्य हैं। वहीं, वर्ष 2018 के बाघ आकलन के मुताबिक प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा 526 बाघ हैं।
कुत्तों से फैलती है बीमारी
केनाइन डिस्टेंपर वायरस कुत्तों के संपर्क में आने से फैलता है। शेर या बाघ एक बार में अपना पूरा शिकार नहीं खाते हैं। ऐसे में कुत्ते कुछ मांस खाते हैं और जब दूसरी बार बाघ इसे खाते हैं, तो यह वायरस बाघ-शेरों में पहुंच जाता है। इस वायरस से कुत्तों में श्वसन, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और आंखों में गंभीर संक्रमण होता है। जिससे इन वन्यप्राणियों की मौत हो जाती है। यह वायरस भेड़िये, लोमड़ी, रेकून, लाल पांडा, फेरेट, हाइना सहित अन्य मांसाहारी जानवरों को भी प्रभावित करता है।





