प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदल दी केदारपुरी की सूरत , अब दूर से नजर आता है बाबा केदार का आलौकिक स्वरूप

आपदा के उस भयानक मंजर के छह साल के बाद केदारनाथ धाम की पूरी तस्वीर बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद केदारघाटी के पुनर्निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी ली। बाबा केदार के दरबार में पहुंचने पर वहां आपदा के निशान न के बराबर हैं। आपदा के बाद का दर्दनाक मंजर देखने वाले अब धाम को देख स्तब्ध हुए बिना नहीं रह सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले कार्यकाल में केदारनाथ पुनर्निर्माण को शुरू करवाया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने 20 अक्टूबर 2017 को केदारनाथ में करोड़ों की लागत से पांच पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया था। कदम कदम पर बेहतर सुविधाओं के साथ ही पैदल मार्ग के प्रारंभिक बिंदु से ही भोले बाबा के धाम का दीदार होने लगता है।

आपदा के उस भयानक मंजर के छह साल के बाद केदारनाथ धाम की पूरी तस्वीर बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद केदारघाटी के पुनर्निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी ली। बाबा केदार के दरबार में पहुंचने पर वहां आपदा के निशान न के बराबर हैं। आपदा के बाद का दर्दनाक मंजर देखने वाले अब धाम को देख स्तब्ध हुए बिना नहीं रह सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले कार्यकाल में केदारनाथ पुनर्निर्माण को शुरू करवाया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने 20 अक्टूबर 2017 को केदारनाथ में करोड़ों की लागत से पांच पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया था। कदम कदम पर बेहतर सुविधाओं के साथ ही पैदल मार्ग के प्रारंभिक बिंदु से ही भोले बाबा के धाम का दीदार होने लगता है।

मंदाकिनी के दाहिने तट से 200 मीटर ऊंचाई पर योग ध्यान गुफा का निर्माण हो चुका है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी एक रात रुककर साधना कर चुके हैं। गुफा का निर्माण पहाड़ी शैली से किया है। ये गुफा पांच मीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी है। जहां पर साधना के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। गुफा की छत पर पहाड़ी पत्थर लगाए गए हैं और उसका आंगन भी इन्हीं से बनाया गया है। साधना के दौरान गुफा का दरवाजा पूरी तरह बंद रहता है और खिड़की से ही उसे भोजन व अन्य जरूरी सामान भिजवाया जाता है। आपात समय के लिए गुफा में लोकल फोन की सुविधा भी है।
केदारनाथ में दिव्य शिला के पीछे बनने वाली आदि शंकराचार्य की समाधि भूमिगत गुफा में होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 मई को धाम पहुंच कर समाधि निर्माण के संबंध में दिशा निर्देश दिये हैं। इसके लिए 100 मीटर लंबी गुफा तैयार की जाएगी। सितंबर 2020 तक इसका कार्य पूरा करने की कोशिश की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ मंदिर परिसर, गोल चबूतरा, मंदिर परिसर व मंदिर मार्ग का विस्तार करने के साथ संगम पर गोल चबूतरा का गोल निर्माण किया जा चुका है। मंदिर परिसर के मुख्य आकर्षण में से एक अराइवल प्लाजा है, जिसका क्षेत्रफल 64 वर्गमीटर है। इसके अलावा टेंपल प्लाजा और सेंट्रल प्लाजा भी यहां आकार ले चुके हैं।
केदारनाथ धाम को अंग्रेजी वर्णमाला के ‘यू’ अक्षर के आकार की तीन दीवारों से घेरा गया है। मंदिर के दोनों ओर मंदाकिनी एवं सरस्वती नदी की धारा के समानांतर पूरे परिसर को घेरते हुए बोल्डर की पहली दीवार बनी है। इसके बाद दूसरा घेरा धातु की जालियों के कवच वाली पत्थरों की दीवार का और तीसरा घेरा कंक्रीट की दीवार का है। केदारघाटी को वापस उसके स्वरूप में लाने के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के जवानों ने कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में मोर्चा संभाला और केदरानाथ में पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया। सर्दियों में कड़ाके की ठंड में भी जवान और मजदूर निर्माण कार्य को तेज गति के साथ आगे बढ़ाते रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यालय में चार बार केदारनाथ धाम दर्शन को पहुंचे थे। पीएम मोदी के बाबा केदार के प्रति गहरी आस्था का नतीजा है कि उन्होंने इसके पुनर्निर्माण के लिए व्यक्तिगत रुचि दिखाई। प्रधानमंत्री पहली बार 3 मई 2017 को केदारनाथ गए थे, उसके बाद 20 अक्टूबर 2017 और 7 नवंबर 2018 को भी पीएम ने शिव साधना की थी। 19 मई 2019 को केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मोदी केदारनाथ क्षेत्र में बनी ध्यान गुफा में ध्यान किया। प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्माण पर लगातार इस पर नजर बनाए रखी। पीएम वीडियो कान्फ्रेंसिंग से पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लेते रहते हैं।
केदारनाथ की भव्यता को बढ़ाने के लिए यहां पहाड़ी शैली के एक 1.10 लाख पत्थर (पठाल) लगाए गए। ये पठाल पैदल मार्ग, मंदिर परिसर और दिव्य शिला के आसपास लगाए गए हैं। मंदिर परिसर और मंदिर के ठीक सामने पैदल मार्ग पर लगे पठालों की चमक धाम के सौंदर्य को और भी बढ़ा रही हैं। इसके लिए पहाड़ के अलावा राजस्थान व अन्य राज्यों से भी पत्थर तराशने वाले कारीगर केदारनाथ बुलाए गए थे। मंदिर के सामने बने चबूतरे पर 40 हजार और मंदिर के पीछे बनी दिव्य शिला पर दस हजार पत्थर लगाए गए हैं।





