प्याज की नर्सरी को बनाया अधिक आमदनी का जरिया

इसौली/सुलतानपुर, 27 अक्टूबर (UjjawalPrabhat.Com)। बल्दीराय तहसील क्षेत्र के गौरा बारा मऊ प्याज की बेरन के लिय मशहूर गांव जो पूरे जिले में इस किसानी के लिये अपनी पहचान बनाई हैं। जो इन किसानों की मेहनत और लगन के बदौलत है। इस गांव के किसान इस फसल के साथ साथ और भी सब्जियों की भी खेती बिधिवत करते है। प्याज की नर्सरी का उपायुक्त समय आखरी अक्टूबर अच्छा समय माना जाता है। यह समय आते ही पूरे गांव में इसकी चर्चा तेज हो जाती है औऱ किसान अपनी अपनी तैयारी में लग जाते है। राम सुख उर्फ कल्लू जो इसी गांव के किसान है जो इस खेती के अनुभवी किसान है। जिनके अनुभव का फायदा गांव के साथ साथ पड़ोसी गांव के किसान भी लेते है। एक बातचीत में बताया कि इसकी तैयारी अक्टूबर माह में तीन चार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बना लेते है और आखरी जोताई से पहले प्रति बीघा एक ट्राली सड़ी गोबर की खाद व रसायनिक खाद 30किलो. डी.ए.पी.10 किलो. पेटास और दयाल की जिन्क 2 किलो.15 किलो. यूरिया को ट्रापडेसिग मे ये सारी मात्रा प्रति बीघा के हिसाब से देते हैं। बीज दर 10 किलो. प्रति बीघा की दर से छोड़ते हैं आगे बुआई की बिधि मे बताया कि खेत को अच्छी तरह बराबर करके दो दो मी की चौड़ाई की कियारियो मे बाट लेते है। बीज को अंक कुरित करके इन्हीं कियारियो मे बो देते हैं बीजों को हाथों या लोहे की बनी हुई कंघी से मिट्टी में मिला देते है। इसके बाद गोबर की भुरभुरी खाद को इन कियारियो मे बिखेर देते है। इसके बाद इन कियारियो मे पानी लागा देते है दो तीन दिन के अन्दर घास की दवा पेन्डामेथलीन नामक रसायन का छिडकाव करके खरपतवार से नियंत्रण करते है। राम सुख ने बताया कि मेरे गांव औऱ क्षेत्र की इस समय सबसे बड़ी समस्या अवारा पशुओं की है, जो इस समय पचासों अवारा पशु लहलहाती फसल को अपना निवाला बना रही। जिससे किसानों का अधिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है यदि ससमय रहते शासन द्वारा उचित कार्यवाही न की गई तो किसानों की स्थिति बद से बत्तर हो जायगी। वहीं प्रगतिशील किसान सोहेल आलम खान ने बताया कि सरकार किसान की फसलों का उचित मूल्य नही मिलने से किसान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। सरकार की किसानों प्रति उदासीन रवैया से किसान का खेती प्रति झुकाव कम होता जा रहा है।
रिपोर्ट- सैय्यद सनाऊद्दीन





