पितृ हे, यदि भूल कोई हो दिखाना पथ हमें

प्रो.विश्वम्भर शुक्ल
हों न मिथ्या आचरण,जो आवरण हों, सत्य हों,
झूठ छ्ल या दंभ के किंचित न कोई कथ्य हों !
पितृ हे, यदि भूल कोई हो दिखाना पथ हमें,
आपका आशीष पाकर हम सदा कृत- कृत्य हों।
कामना प्रतिदिन यही, हों उर पटल पर आप ही,
मन विकल होने लगे तब बोल प्रेरक पथ्य हों !
आपकी अभ्यर्थना, नित आपकी आराधना ,
अनुगमन कर आपका हम श्रेष्ठ सब अपत्य* हों !
पूर्वजों का मान ही सबका मनोरथ साध्य हो ,
हर्ष पूरित हों दिवस पल पल सुखद, नव नृत्य हों !
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