पितरों के आशीर्वाद के लिए कहां और कैसे जलाएं दीया?

हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि का बहुत गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह वह दिन है जब चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता, जिसे ज्योतिष की दृष्टि से ‘शून्यता’ और अध्यात्म की दृष्टि से ‘पितरों का समय’ माना जाता है।
साल 2026 में आने वाली अमावस्या तिथियों पर अगर आप कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाते हैं। तो, मान्यता है कि इससे न केवल घर का अंधेरा दूर होता है, बल्कि पितरों के आशीर्वाद से जीवन की बड़ी-बड़ी बाधाएं भी समाप्त हो जाती हैं।
दीपक जलाने का महत्व और परंपरा
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन हमारे पूर्वज (पितृ) पृथ्वी लोक के करीब होते हैं। ‘गरुड़ पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि जो लोग अमावस्या के दिन अपने पितरों के नाम से दीपदान करते हैं। उनके पितृ तृप्त होकर उन्हें सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक
घर के मुख्य द्वार यानी दहलीज पर दीपक जलाना सबसे जरूरी माना गया है। यह न केवल लक्ष्मी जी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को भी घर में घुसने से रोकता है। कोशिश करें कि दीपक का मुख बाहर की ओर हो।
अमावस्या की शाम को घर की दक्षिण दिशा (South Direction) में एक दीपक जरूर रखें। दक्षिण दिशा पितरों की मानी जाती है। इसलिए, यहां दीपक जलाने से उन्हें मार्ग दिखाई देता है और वे प्रसन्न होते हैं।
ऐसी मान्यता है कि पीपल के पेड़ में त्रिदेवों के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है। अमावस्या पर शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है और शनि दोष (Shani Dosha) भी कम होता है।
आपके घर में जहां पानी रखने का स्थान (मटका या आरो) है, वहां एक छोटा दीपक जलाएं। शास्त्रों में जल स्थान को भी पितरों का स्थान माना गया है। इससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
अगर संभव हो, तो पास के किसी मंदिर में जाकर दीपदान करें। यह आपके पुण्य कर्मों में वृद्धि करता है और मन के अनजाने डर को दूर करता है।
अमावस्या पर दीपदान के लाभ
अमावस्या के दिन दीपदान करने से कुंडली के ‘पितृ दोष’ (Pitru Dosha) का प्रभाव कम होता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि भले ही हमारे पूर्वज हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनका स्नेह और संरक्षण हमेशा हमारे जीवन को रोशन करता है।





