नया प्लान बना रहे जेलेंस्की, हर रोज 1 हजार इंटरसेप्टर ड्रोन बनाएगा यूक्रेन

रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। दोनों देश एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। यूक्रेन पर रूस के ड्रोन हमले काफी तीव्र होते जा रहे हैं। रूस के इन तीव्र हमलों को यूक्रेन के पारंपरिक ड्रोन सिस्टम रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

इन सब के बीच यूक्रेन ने एक बड़ा फैसला लिया है। यूक्रेन अब हर दिन 1000 से अधिक इंटरसेप्टर ड्रोन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। रूस से जारी इस भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन की ये नई नीति कारगर साबित हो सकती है। आइए आपको बताते हैं कि क्या होते हैं इंटरसेप्टर ड्रोन…

कैसे काम करते हैं इंटरसेप्टर ड्रोन
ये आधुनिक प्रकार के ड्रोन होते हैं, जो दुश्मन ड्रोन से टकरा कर उसे हवा में ही खत्म कर देते हैं। अपनी इस नीति पर अगर यूक्रेन सफल होता है तो कहीं ना कहीं वह रूसी हमलों से निपटने में सक्षम हो जाएगा।

जानकार बताते हैं कि ये ड्रोन करीब 300 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से 5,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होते हैं। इतना ही नहीं वे दुश्मन के ड्रोन को सीधा टक्कर मार कर के विस्फोट करते हैं।

कितने असरदार साबित होंगे ये ड्रोन?
एक रिपोर्ट में बताया गया कि इंटरसेप्टर ड्रोन की सफलता 70 प्रतिशत होती है। ये पुराने गेरान ड्रोनों के मुकाबले काफी कारगर साबित होते हैं। अगर ड्रोन बनाने में सफलता मिल जाती है को यूक्रेन के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

रूस के स्वार्म अटैक को रोकने में कारगर नहीं
जानकार बताते हैं कि ये इंटरसेप्टर ड्रोन रूस के स्वार्म अटैक को रोकने में पूरी तरीके से सक्षम नहीं हैं। बताया जाता है कि ये ड्रोन कम दूरी की रक्षा के लिए स्काई सेंटिनल व स्काइनेक्स जैसी गनों की भी जरूरत है। हालांकि, इस प्रकार का सिस्टम न आने के तक इंटरसेप्टर एक तरीके से कारगर साबित हो सकते हैं।

यूक्रेन की मौजूदा एअर डिफेंस प्रणाली कैसे कमजोर पड़ रही?
यूक्रेन वर्तमान में अपना पारंपरिक एअर डिफेंस आयरिश-टी या जर्मन गेरान का उपयोग करता है। हालांकि, ये एअर डिफेंस सिस्टम तेज गति व ऊंचाई से उड़ने वाले ड्रोन उन्हें चकमा दे रहे हैं। यही वजह है कि यूक्रेन अब इंटरसेप्टर ड्रोन बनाने पर विचार कर रहा है।

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