ध्यान के साथ तनाव प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाएगा राजयोग ट्रेनिंग सेंटर

लखनऊ। सुल्तानपुर मार्ग पर गुलजार उपवन में तीन एकड़ में बने ब्रह्माकुमारीज के नवनिर्मित राजयोग ट्रेनिंग सेंटर के पहले चरण का शुभारंभ शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। भविष्य में यह उत्तर प्रदेश के लिए राजयोग प्रशिक्षण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा, ऐसा मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भी कहा। यहां राजयोग मेडिटेशन और आध्यात्मिक ज्ञान की निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। यह केंद्र ध्यान के साथ तनाव प्रबंधन में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

केंद्र के व्यवस्थापकों के अनुसार, पहले चरण के तहत यहां दिव्य संस्कृति भवन का निर्माण किया गया है जिसमें दो सेमिनार हाॅल बनाए गए हैं। दोनों ही हाल में 200-200 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। दूसरे चरण में दो हजार लोगों की क्षमता वाला विशाल ऑडिटोरियम भी तैयार किया जाएगा। तीसरे चरण में 300 लोगों के ठहरने की व्यवस्था के लिए भवन का निर्माण किया जाएगा। फिलहाल यहां मेडिटेशन कक्ष बनाए गए हैं। इस भवन में पांच हजार लोगों के भोजन तैयार करने के लिए बड़े भंडारे का भी निर्माण किया गया है।

केंद्र से जुड़े जनसंपर्क अधिकारी बीके कोमल के अनुसार, इस केंद्र से प्रदेशभर में ध्यान योग के अभियान चलाए जाएंगे। तनाव प्रबंधन के लिए प्रबंधन कौशल शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए सशक्तीकरण के कार्यक्रम भी होंगे। ह्दय रोग, डायबिटीज और नशामुक्ति के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का भी संचालन होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की योजना है। केंद्र की ओर से पूरे प्रदेश में आयोजन कराने की योजना है।

जानिए, क्या है राजयोग

राजयोग का अर्थ है योगों का राजा जो आत्म नियंत्रण, ध्यान और आंतरिक अनुशासन पर केंद्रित मार्ग है। राजयोग का उद्देश्य मन और इंद्रियों को शांत करके आत्म साक्षात्कार और उच्च चेतना को प्राप्त करना है। यह जीवन को सरल बनाने के साथ ही एकाग्रता बढ़ाने और सकारात्मक जीवन जीने का तरीका माना जाता है। ब्रह्माकुमारीज के अनुसार, राजयोग वह सरल ध्यान तकनीक है जो मनुष्य को आत्मा के रूप में अपनी पहचान करने और परमात्मा से संबंध स्थापित करने में मदद करती है। इसका उद्देश्य मन की शांति है जो प्रेम और शक्ति का संचार करता है। यह बिना किसी अनुष्ठान या मंत्र के किया जाने वाला ध्यान है।

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