देश की आखिरी महारानी अलविदा, पटियाला राजमाता मोहिंदर कौर की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

  • पटियाला.पटियाला रियासत और देश की आखिरी राजमाता रही मोहिंदर कौर को शहर ने नम आंखों से विदाई दीं। शहर ने उनके सम्मान में उनकी शवयात्रा पर फूलों की वर्षा की, सभी बाजारों के दुकानदारों ने दुकानों को बंद रखा। दोपहर करीबन 12:50 बजे उनकी शव यात्रा न्यू मोती बाग पैलेस से निकली। 535 गाड़ियों का काफिला शवयात्रा में शामिल हुआ। पंजाब पुलिस के 500 से अधिक मुलाजिम व अधिकारी ड्यूटी पर तैनात किए गए थे।535 गाड़ियां शामिल हुईं अंतिम यात्रा में…
    देश की आखिरी महारानी अलविदा, पटियाला राजमाता मोहिंदर कौर की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
     
    शवयात्रा न्यू मोती बाग पैलेस से निकल कर ठीकरी वाला चौक, फव्वारा चौक, शेरां वाला गेट, अदालत बाजार, धर्मपुरा बाजार, अनारदाना चौक, किला चौक, बर्तन बाजार, गुड़ी मंडी होते हुए शाही समाधां पहुंची। शहर में कई जगह दुकानदारों ने उनके सम्मान में शवयात्रा रोक उन्हें श्रद्धासुमन भेंट किए।
     
    रणइंदर की बेटियां इनायत इंदर व सहरइंदर ने दादी को याद कर बहाए आंसू : न्यू मोती बाग पैलेस में सुबह ही कांग्रेसी समर्थकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। परनीत कौर, जयइंद्र कौर व उनके बेटा-बेटी, युवराज रणइंदर व उनकी दोनों बेटियां इनायतइंदर कौर व सहरिंदर कौर इस दौरान राजमाता के शव के साथ ही रहे और दादी के बिछोड़े में आंसू बहाती रही। इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह के पौत्र व दोहते निर्वाण सिंह, अंगद सिंह व यदुइंदर सिंह भी फूलों से लदी राजमाता को लेकर जाने वाली गाड़ी में सवार होकर संस्कार स्थल तक पहुंचे।
     
    इधर कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके भाई मालविंदर सिंह भी शव यात्रा के पीछे गाड़ी में मौजूद रहे। मोहिंदर कौर की जानकार कई बुजुर्ग महिलाएं साथ दिखीं। राजमाता मोहिंदर कौर अपने पीछे 2 बेटे कैप्टन अमरिंदर सिंह व मालविंदर सिंह समेत 2 बेटियां हेमइंदर कौर पत्नी कंवर नटवर सिंह और रूपिंदर कौर पत्नी मेजर ढिल्लों को छोड़ गई हैं।
     
    राज माता मोहिंदर कौर अमर रहे से गूंजा हर गली चौराहा
    राज माता मोहिंदर कौर की अंतिम यात्रा में मानों पूरा शहर उमड़ पड़ा। शहरवासियों ने अपनी आखिरी राजमाता को भरे मन से विदाई दी। हर गली चौराहे पर राज माता मोहिंदर कौर अमर रहे के नारे सुनाई दिए। क्या कांग्रेसी, क्या अकाली मानों क्या भाजपाई, सबने राजनीति से ऊपर उठकर राजमाता को नमन किया।
    120 मिनट तक तय रूट पर खड़े रहे लोग।
     
    राज पुरोहित व भाई त्रिलोचन सिंह ने करवाया दाह संस्कार
    पटियाला रियासत के राज पुरोहित गिरधर शर्मा, भाई त्रिलोचन सिंह व उनके सहायक भाई मेवा सिंह ने राज माता का हिंदू व सिख धार्मिक रीति रिवाजों से संस्कार करवाया। पहले राज पुरोहित गिरधर शर्मा ने राजमाता के मुंह पर पंचरत्न, देसी घी डाल, चंदन की लकड़ी घी में डाल सामग्री से हवन करवा संस्कार करवाया। सिख धर्म के मुताबिक सुखमनी साहिब का पाठ हुआ और अरदास करवाई गई। संस्कार के बाद रागी जत्थों में भाई कुलवंत सिंह ने गुरबाणी का इलाही कीर्तन किया।
     
    झलकियां
    – राजमाता मोहिंदर कौर का शव उनके आवास न्यू मोती बाग पैलेस की पहली मंजिल के हॉल में रखा गया था। परनीत कौर व उनकी बेटी जयइंद्र कौर समेत कई रिश्तेदार महिलाएं सारी रात उसी हॉल में शव के पास बैठे रहें।
    – शाही समाधां में संस्कार करने की सभी तैयारियों का जिम्मा नगर निगम को सौंपा गया। साफ सफाई से लेकर टेंट लगाने, मेन एंट्री की मरम्मत और बंद स्ट्रीट लाइट को जलाने का काम अल सुबह कुछ घंटों में कर दिया गया।
    – शवयात्रा के दौरान करीब ढाई घंटे तक चलने के दौरान एक अधिकारी की पायलट गाड़ी इंजन गर्म होने पर बंद पड़ी तो जाम लग गया।
    – शाही समाधां पहुंचते ही यात्रा के दौरान चल रही गाड़ियों के ड्राइवर ने अन्य स्टाफ ने डिग्गी खोल कर लंच किया।
    – पटियाला के लगभग सभी डिपार्टमेंट्स जैसे पीआरटीसी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पावरकॉम, जिमखाना क्लब समेत कई संस्थाओं ने अपने स्तर पर शवयात्रा को रोक श्रद्धांजलियां दी।
     
    तब राजमाता ने चांदी के बर्तनों में पिलाई थी चाय
    1966 में मोती पैलेस से जुडे 80 साल के देवराज गर्ग पैलेस के हर सुख-दुख में शरीक होते रहे। टकसाली कांग्रेसी नेता देवराज गर्ग वडैचां वाले ने राज माता मोहिंदर कौर के साथ अपनी यादें ताजा करते हुए बताया कि 1966 में उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा। समाना से उसे ओर उसके साथी कुलवंत सिंह कुतबनपुर को तबके एसडीएम इकबाल सिंह ने राजमाता से मिलाया। पैलेस पर पहुंचने पर राजमाता उन्हें पैलेस के ऊपर की मंजिल पर ले गईं। अपने हाथों से चांदी के बर्तनों में चाय पिलाई। यह क्षण आज भी उन्हें याद है। तब से लेकर आज तक वह पैलेस व राजमाता से जुडे रहे।
    राजमाता ने कभी भी उन्हें मिलने से इंकार नहीं किया। एक बार राजमाता विशेष तौर पर उनके गांव वडैचां को देखने भी आई। उनसे मिलकर वाकई ही माता जैसा अहसास होता था। उनकी वजह से ही पैलेस में उनकी पहचान बरकरार रही।
     
    फोटो खींचने के चक्कर में महाराजा यादविंदर सिंह की समाधि पर चढ़े
    राजमाता मोहिंदर कौर का संस्कार उनके पति स्व. महाराजा यादविंदर सिंह की समाधि के बिल्कुल साथ किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग जिसमें कांग्रेसी भी शामिल थे, जूते लेकर महाराजा यादविंदर सिंह की समाधि पर चढ़ गए। पूरे संस्कार के दौरान लोग समाधि के ऊपर खड़े रहे। हालांकि बाद में जिला प्रशासन को जब इल्म हुअा तो पुलिस ने मुश्किल से लोगों को समाधि से नीचे उतारा।
     
    संस्कार स्थल पर नहीं आई शाही घराने की महिलाएं
    राजमाता मोहिंदर कौर के शाही समाधां स्थल पर संस्कार में शाही घराने की महिलाएं शामिल नहीं हुई। जैसे ही शवयात्रा न्यू मोती बाग पैलेस से निकली तो, सिर्फ राजघराने के पुरुष इस शवयात्रा में शामिल हुईं। परनीत कौर, उनकी बेटी जयइंदर कौर, युवराज रणइंदर सिंह की बेटियां इनायतइंदर कौर व सेहरिंदर कौर सहित बाकी रिश्तेदार महिलाएं न्यू मोती बाग पैलेस में रुकी रहीं। ये महिलाएं न शवयात्रा में आई और न ही शाही समाधां पहुंची। राजपुरोहित गिरिधर शर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया कि पटियाला रियासत में यह पंरपरा है कि इस घराने की महिलाएं न जंझ (बारात) चढ़ती हैं और न ही कोई मौत होने पर संस्कार में शामिल होती हैं।
     
    बेटों ने दी मुखाग्नि
    राजमाता मोहिंदर कौर को उनके बेटे कैप्टन अमरिंदर सिंह औा मालविंदर सिंह ने दोपहर 3:24 बजे मुखाग्नि दी। इसके बाद रागी जत्थों ने गुरबाणी का इलाही कीर्तन किया गया। वीरवार सुबह शाही समाधां में ही फूल चुगने की रस्म अदा की जाएगी।
     
    पीयू के दो पूर्व प्रोफेसरों की जेब कटी
    अंतिम यात्रा में पीयू के दो प्रोफेसरों की जेब जेबकतरों ने काट ली। प्रोफेसर कुलवंत सिंह ग्रेवाल और बलकार सिंह की जेब कटी है, जिस वजह से उन्हें कैश, एटीएम व अन्य जरूरी कागजात का नुक्सान हुआ है। तवक्कली मोड व महल के बाहर ही जेबकतरों को लेकर शोर पड़ गया था, जिस वजह से कई लोगों ने अपने पर्स को पिछली जेब से निकाल या तो गाड़ी में रखवा दिया।
     
     
     
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