दिल्ली: कोविड मौत के दावे पर मिला न्याय, परिवार को 3 करोड़ रुपये देने के आदेश… 

दिल्ली की जिला उपभोक्ता अदालत ने आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह मृतक योगेश गुप्ता के परिवार को 3 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान करे। यह क्लेम कंपनी ने यह कहते हुए पहले खारिज कर दिया कि योगेश ने अपनी पुरानी बीमारियों को पॉलिसी लेने के समय छिपाया था।

लेकिन अदालत ने कंपनी के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान कोरम की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्रा की पीठ ने 6 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया। पीठ ने कंपनी को आदेश दिया कि वह 3 करोड़ रुपये की राशि पर क्लेम की तारीख से 6 फीसदी सालाना ब्याज दे।

पीठ ने कहा कि अगर चार हफ्तों में भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 9 फीसदी हो जाएगी। इसके अलावा परिवार को मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये भी दिए जाएंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने तीन मुख्य बिंदुओं को आधार बनाया। इसमें मौत कोविड-19 से हुई थी न कि किसी पुरानी बीमारी से। ऐसे में पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया।

इसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि कोविड से हुई मौत पर क्लेम रोकना गलत है। कंपनी ने खुद मेडिकल टेस्ट करवाए थे और कोई गंभीर समस्या नहीं मिली, इसलिए बीमारी छिपाने का आरोप गलत है। इसके अलावा मौत का वास्तविक कारण डायबिटीज नहीं, बल्कि कोविड था। अदालत ने इस मामले में पुराने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के फैसलों का हवाला दिया।

पॉलिसी अप्रैल 2020 में हुई थी जारी
मामले में योगेश गुप्ता ने मार्च 2020 में 3 करोड़ रुपये की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। उन्होंने पॉलिसी की पहली किस्त के रूप में 30 लाख रुपये जमा किए। कंपनी ने उनके मेडिकल टेस्ट भी करवाए, जिसमें कोई गंभीर समस्या नहीं पाई गई। उनके एचबीए1सी लेवल 5.6 फीसदी, जो सामान्य था और डायबिटीज का कोई संकेत नहीं था। पॉलिसी अप्रैल 2020 में जारी हुई। अप्रैल 2021 में योगेश कोविड-19 से संक्रमित हो गए और दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती हुए।

हालत गंभीर होने के चलते 8 मई 2021 को हो गई थी योगेश की मौत
इसी कड़ी में उनकी हालत गंभीर हो गई और 8 मई 2021 को उनकी मौत हो गई। अस्पताल की रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण गंभीर कोविड निमोनिया बताया गया जबकि डायबिटीज और हाइपोथायरॉइडिज्म के बारे में भी जिक्र था। योगेश की पत्नी कविता गुप्ता और उनके दो बच्चे बेटी रिचा और बेटा वरुण ने मई 2021 में क्लेम दाखिल किया, लेकिन कंपनी ने इसे खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि योगेश ने पॉलिसी लेने के समय अपनी डायबिटीज छुपाई थी। परिवार ने फरवरी 2022 में दिल्ली उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।

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