‘तीसरे बाजार की तलाश तेज’, अमेरिकी टैरिफ से भारत जैसे देशों पर कोई खास असर नहीं

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत, चीन और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर अमेरिकी टैरिफ का कोई खास असर नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देश टैरिफ के झटकों से निपटने के लिए मजबूत स्थिति में हैं। मेक्सिको और वियतनाम जैसे देश अमेरिकी व्यापार पर निर्भर हैं, लेकिन उनकी नीतियां उन्हें लचीला बनाती हैं। चीन अपनी विविध अर्थव्यवस्था के कारण मजबूत है।

जोखिम परामर्श फर्म ‘वेरिस्क मैपलक्रोफ्ट’ की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं, जैसे भारत, चीन और ब्राजील पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ का कोई खास असर नहीं होगा। यह निष्कर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

रिपोर्ट में 20 प्रमुख उभरते बाजारों का मूल्यांकन कर्ज स्तर, निर्यात पर निर्भरता और व्यापारिक अस्थिरता और तेजी से बदलते वैश्विक गठजोड़ जैसी कसौटियों पर किया गया। इसमें पाया गया कि अधिकांश निर्माण केंद्र, जिनमें एशिया के देश भी शामिल हैं, अमेरिकी टैरिफ के झटकों से निपटने के लिए अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में हैं।

‘तब भी असर सीमित रहेगा’

एशिया रिसर्च की प्रमुख और रिपोर्ट की सहलेखक रीमा भट्टाचार्य ने कहा, “दुनिया के अधिकांश देश इस टैरिफ तूफान से निपटने की बेहतर स्थिति में हैं। यहां तक कि अगर अमेरिका पूरी क्षमता से टैरिफ बढ़ाता है, तब भी असर सीमित रहेगा।”

मेक्सिको और वियतनाम को अमेरिकी व्यापार पर सबसे ज्यादा निर्भर माना गया है, लेकिन वहां की प्रगतिशील नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा और राजनीतिक स्थिरता उन्हें लचीला बनाती हैं। वहीं ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश वैकल्पिक व्यापारिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत कर रहे हैं, जो भविष्य में उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

‘बढ़ रही तीसरे बाजार की तलाश’

भट्टाचार्य ने कहा, “लगभग हर उभरता बाजार समझता है कि अमेरिका और चीन दोनों के साथ व्यापार जरूरी है, लेकिन किसी एक पर अधिक निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसलिए अब तीसरे बाजार की तलाश बढ़ रही है।”

उन्होंने बताया कि चीन, हालांकि अमेरिकी तनावों से ज्यादा प्रभावित है, फिर भी उसका विविध निर्यात ढांचा और मानव संसाधन उसे प्रतिस्थापित करना लगभग असंभव बनाते हैं। चीन ने रेनमिन्बी मुद्रा में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है ताकि आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव किया जा सके।

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