ताजमहल नहीं, वेद-पुराण, रामायण व गीता है भारत की पहचान : सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि ताजमहल भारत की पहचान नहीं हो सकता। तथाकथित सेकुलर लोगों ने भारत की असली पहचान छिपाने के लिए उसे केवल ताजमहल तक सीमित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि परंपरा, संस्कृति और विरासत को गाली देना सेकुलरिज्म है तो हमें इसकी जरूरत नहीं है।
ताजमहल नहीं, वेद-पुराण, रामायण व गीता है भारत की पहचान
योगी आदित्यनाथ ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि पहले भारत की पहचान ताजमहल से की जाती थी, हम इसे भगवद्गीता और रामायण तक लेकर जा रहे हैं। हमारी पहचान वेदों, पुराणों, रामायण, गीता और उपासना विधियों से हो सकती है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब केवल हिंदू नहीं है। यदि सेकुलर का मतलब सर्वधर्म समभाव है तो हिंदू से बड़ा सेकुलर कौन है? क्या यहां मजहब और उपासना पद्धति के आधार पर भेदभाव हुआ है? तथाकथित सेकुलरवादियों ने इसे केवल तुष्टीकरण का पोषक बना दिया। इसे विकृत भाव से प्रस्तुत किया गया जो हमें स्वीकार नहीं है।

सरकार में दखल किसी का नहीं, सलाह सबकी

सीएम ने कहा कि उनकी सरकार में हस्तक्षेप किसी का नहीं है लेकिन बहुत सारे मुद्दों पर प्रधानमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मार्गदर्शन लेते रहते हैं। केंद्रीय मंत्रियों को बुलाकर भी चर्चा करते रहते हैं। हमारी नई सरकार है, राय की जरूरत पड़ती है, केंद्रीय सहायता की जरूरत पड़ती है। हमने नीति आयोग को भी बुलाया था।

नीतीश पर अब नो कमेंट

हाल में ही बिहार की सभा में नीतीश से ट्रिपल तलाक की चुप्पी पर जवाब मांगने वाले योगी आदित्यनाथ ने उन्हें लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। बोले-जो कहना था, बिहार में कह दिया। अब उस पर क्या बोलना?

जातीय हिंसा में राघव लखनपाल को क्लीन चिट

सपा-बसपा ने नौकरशाही को सर्कस का शेर बना दिया: सीएम योगी
सीएम ने सहारनपुर की जातीय हिंसा में सांसद राघव लखनपाल की भूमिका को नकार दिया। कहा कि राघव का जातीय विवाद से कोई संबंध नहीं है। उनका मामला दूसरा था, शोभायात्रा से संबंधित था। सहारनपुर में जातीय हिंसा ने तब वीभत्स रूप लिया जब मायावती वहां गईं। वह न जातीं तो विवाद न बढ़ता।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम 18-20 घंटे काम कर रहे हैं। हम ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना चाहते हैं कि प्रदेश से पलायन और भेदभाव रुके, प्रदेश को विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा किया जा सके। हमारी पहली परीक्षा 2019 के लोकसभा चुनाव में होगी, हम उसी को ध्यान में रखकर कार्ययोजना बना रहे हैं।

मैं फुल टाइम पॉलिटिशियन नहीं

योगी आदित्यनाथ ने कहा, मैं फुल टाइम पॉलिटिशियन नहीं हूं। राजनीति मेरा पेशा नहीं है। कुछ समय के लिए राजनीति में आया हूं, इसे सेवा के साधन के रूप में स्वीकार किया है। मेरा फुल टाइम जॉब वही है, जिस रूप में लोग मुझे देखते हैं।

मैं जितनी देर के लिए राजनीति में हूं, अपने दायित्व का मजबूती से निर्वहन कर रहा हूं। मेरी कोशिश है कि प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की अपेक्षाओं पर खरा उतरूं।

पेशी के लिए आए आडवाणी-जोशी से मिलना गलत नहीं

अयोध्या मामले में सीबीआई कोर्ट के सामने पेश होने आए लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती व अन्य नेताओं से मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है। वह नेताओं के प्रति सम्मान भाव प्रकट करने के लिए गए थे। सीएम भी आदमी है और मैं आदमी के रूप में उनसे मिलने गया था।

कारसेवकपुरम आ रहे पत्थरों को रोकने की आवश्यकता नहीं

अयोध्या मामले पर योगी ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष बैठेंगे और रास्ता निकलेगा। सरकार इसमें पक्षकार नहीं है इसलिए उसकी कोई भूमिका नहीं है।

अयोध्या में पहुंचाए जा रहे पत्थरों को लेकर उनका कहना था कि पत्थर उस भूमि पर नहीं लाए जा रहे हैं जिसका मामला कोर्ट में है। कारसेवकपुरम में आ रहे हैं, इसलिए इसे रोकना नहीं चाहिए। पत्थरों के लिए एप्रूवल की आवश्यकता नहीं है। अगर कानून-व्यवस्था आड़े नहीं आ रही है तो इसे रोका नहीं जाना चाहिए।

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