डीजल पर 34 रुपये और ATF पर 12 रुपये निर्यात शुल्क बढ़ा

भारत सरकार ने डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क को बढ़ा दिया है। शनिवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक अब डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 55.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
इसी तरह एटीएफ (विमान ईंधन) पर शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क अभी भी शून्य ही रखा गया है।
घरेलू बाजार पर नहीं कोई असर
सरकार का यह फैसला मौजूदा पश्चिमी विवाद के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के संदर्भ में लिया गया है। यह इस बात का संकेत है कि देश में पेट्रोल-डीजल-एटीएफ की घरेलू आपूर्ति सामान्य बनी हुई है लेकिन वैश्विक स्तर पर आपूर्ति ठीक नहीं हो पाई है।
भारत ने पहले ही कहा था कि उसके पास 70 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है। यह बात दो हफ्ते पहले कही गई थी। अभी ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता जारी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए, लेकिन इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह कदम राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि पेट्रोलियम कंपनियों को घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार नहीं चाहती कि कंपनियां निर्यात को बढ़ावा देकर घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित होने दें।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी रोजाना यह बयान जारी कर रहे हैं कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बावजूद उसने घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। वहीं, भारत के पड़ोसी देशों समेत दुनिया के लगभग सभी देशों में पेट्रो उत्पादों की खुदरा कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं।
हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि भारतीय तेल कंपनियां पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 104 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी (घाटा) झेल रही हैं। ऐसे में इस बात की आशंका है कि तेल कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए भारत से पेट्रो उत्पादों की दूसरे देशों की तरफ भेज सकती हैं।
निजी रिफाइनरी के निर्यात पर पड़ेगा असर
यह फैसला देश की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी सीधा असर डालेगा। रिलायंस भारत में पेट्रो उत्पादों की सबसे बड़ी निर्यातक कंपनी है और उसका डीजल निर्यात का हिस्सा काफी बड़ा है।
निर्यात शुल्क में इस भारी बढ़ोतरी से कंपनी के डीजल निर्यात की लागत बढ़ जाएगी, जिससे निर्यात पर मिलने वाला मुनाफा कम हो जाएगा। नतीजतन कंपनी को या तो निर्यात की मात्रा घटानी पड़ेगी या फिर घरेलू बाजार में ज्यादा उत्पाद बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा।
गौरतलब है कि सरकार ने कुछ समय पहले उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती करके तेल कंपनियों को राहत दी थी, ताकि वे घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रख सकें। अब निर्यात शुल्क बढ़ाकर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कंपनियां निर्यात के चक्कर में घरेलू सप्लाई को नजरअंदाज न करें।
भारत अपनी जरूरत का 90 फीसद तक कच्चा तेल और 60 फीसद तक गैस बाहर से आयात करता है। दुनिया की प्रमुख इकोनोमी में कोई भी दूसरा देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी देशों पर इतना निर्भर नहीं है।
भारत में अभी रोजाना 55-56 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत है। दुनिया में इसकी जितनी मांग बढ़ रही है, उसका 30 फीसद सिर्फ भारत में आ रहा है। अभी भारत 40 से ज्यादा देशों से क्रूड खरीद रहा है। लेकिन पश्चिम एशियाई देश प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं।





