ट्रंप के व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट का भारी विरोध

डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में बॉलरूम बनाने के प्रोजेक्ट का भारी विरोध हो रहा है। एक सरकारी पैनल की मीटिंग में लोगों ने इसे गैर-जरूरी बताया। 400 मिलियन डॉलर के इस प्रोजेक्ट के लिए अमीर डोनर्स से पैसा लेने पर भी सवाल उठे हैं। पैनल 2 अप्रैल को इस पर फैसला लेगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में बॉलरूम बनाने के प्लान पर जमकर हंगामा हुआ। इस प्रोजेक्ट का रिव्यू करने वाले एक सरकारी पैनल (नेशनल कैपिटल प्लानिंग कमीशन) को गुरुवार को जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। मीटिंग में शामिल होने वाले लगभग सभी लोगों ने इस प्रोजेक्ट की आलोचना की और इसे बहुत बड़ा और बेकार बताया।
मार्च की इस मीटिंग में पहले दो घंटों के दौरान 28 लोगों ने अपनी बात रखी। इनमें से सिर्फ एक व्यक्ति ने प्रोजेक्ट का समर्थन किया, जबकि बाकी सब इसके खिलाफ थे। एक आम नागरिक काई रोवन ने इसे भद्दा और जरूरत से ज्यादा बड़ा बताया। इलिनोइस की पूर्व मेयर डायने मार्लिन ने कमीशन से अपील की कि वे इस पर फिर से विचार करें। उन्होंने कहा कि इसे सही करने के लिए और समय लेना चाहिए।
इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीब 3300 करोड़ रुपये) है। ट्रंप का प्लान है कि यह पैसा अमीर लोगों और बड़ी कंपनियों से दान के रूप में लिया जाए। इसी बात पर सबसे ज्यादा विवाद है। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था कॉमन कॉज की एबिगेल बेलोज ने सवाल उठाया कि ये डोनर्स लाखों डॉलर बिना किसी फायदे के क्यों देंगे? उन्होंने आशंका जताई कि इसके बदले में डोनर्स सरकार से कुछ उम्मीद रख सकते हैं। हालांकि, कमीशन के चेयरमैन विल शार्फ ने कहा कि पैसों से जुड़ी चिंताएं उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं।
प्रोजेक्ट के पक्ष में बोलने वाली अकेली महिला तारा ब्राउन थीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को इस तोहफे के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए। उनके मुताबिक, सुरक्षा के लिहाज से यह बॉलरूम बहुत जरूरी है और यह लोगों को एक साथ लाने का काम करेगा।
कमीशन के पास इस प्रोजेक्ट को लेकर 35,000 से ज्यादा लिखित कमेंट्स आए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग ट्रंप के उस प्लान के खिलाफ हैं जिसमें व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग की जगह 90,000 स्क्वायर फुट का नया हिस्सा बनाने की बात कही गई है। ट्रंप ने पिछले साल अक्टूबर में ही ईस्ट विंग को गिरा दिया था। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप को मंजूरी मिलने से पहले पुरानी इमारत नहीं गिरानी चाहिए थी।
इस मामले में कानूनी लड़ाई भी चल रही है। ‘नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन’ ने कोर्ट से इस निर्माण को रोकने की मांग की थी। उनका कहना है कि जब तक कांग्रेस और सरकारी पैनल से मंजूरी न मिल जाए, काम रुकना चाहिए। हालांकि, एक जज ने पिछले हफ्ते इस मांग को खारिज कर दिया। अब यह पैनल 2 अप्रैल को मीटिंग करेगा और प्रोजेक्ट पर अपना आखिरी वोट डालेगा। चेयरमैन विल शार्फ ने कहा कि वे चाहते हैं कि हर किसी को अपनी बात रखने का मौका मिले।





