झींडा बने रहेंगे एचएसजीपीसी के प्रधान, दादूवाल ने कराया नलवी से समझौता

गुहला-चीका (कैथल).हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) में चल रहा टकराव फिलहाल थम गया है। तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने हस्तक्षेप करके जगदीश सिंह झींडा और दीदार सिंह नलवी के बीच समझौता करवा दिया। झींडा ही कमेटी के अध्यक्ष रहेंगे। जबकि झींडा को हटाकर खुद को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित करने वाले नलवी फिर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष का पद संभालेंगे। बाकी कार्यकारिणी जस की तस रहेगी। हालांकि 40 सदस्यीय कमेटी में तीन सदस्यों की जगह नई नियुक्तियां करने पर सहमति बन गई है। 33 सदस्य बैठक में पहुंचे थे।

चीका के गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठीं व नौंवी में पांच घंटे चली बैठक में कई बार गरमा-गरमी की नौबत आई। एक बार तो मामला इतना बिगड़ा कि दादूवाल ने मीडिया को मीटिंग से बाहर कर दिया। झींडा चाहते थे कि मीडिया के सामने ही बैठक हो। इस पर दादूवाल मीटिंग छोड़कर चल दिए, बाद में बड़ी मुश्किल से माने। बैठक के बाद दादूवाल ने मीडिया को ब्रीफ किया। बोले- झींडा की अगुवाई वाली कमेटी को ही अगले अढ़ाई साल तक कायम रखने का फैसला किया गया है। झींडा व नलवी दोनों पक्षों ने तख्त श्री दमदमा साहिब का जत्थेदार होने के नाते मामला सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। सभी पक्षों में सुलह हो गई है। जगदीश झींडा ने कहा कि सुलह हो गई है। 15 अगस्त से पहले राजनीतिक पार्टी का नाम घोषित कर दिया जाएगा।
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अकाल तख्त पर पेश होने से खफा था नलवी गुट
10 अप्रैल को दीदार सिंह नलवी गुट ने बैठक करके झींडा को प्रधान पद से हटाने का फैसला सुनाया था। तब नलवी को 7 मई तक के लिए कार्यकारी प्रधान बना दिया गया था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), अमृतसर से अलग कमेटी बनाने की पैरवी करने वाले झींडा और नलवी को अकाल तख्त ने पंथ से बाहर कर दिया था। अप्रैल में झींडा अकाल तख्त के जत्थेदारों को समक्ष पेश हो गए थे। पंथक सजा के बाहर जत्थेदारों ने उनकी पंथ वापसी कराई थी। नलवी गुट झींडा के इसी कदम से नाराज था।
10 अप्रैल को दीदार सिंह नलवी गुट ने बैठक करके झींडा को प्रधान पद से हटाने का फैसला सुनाया था। तब नलवी को 7 मई तक के लिए कार्यकारी प्रधान बना दिया गया था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), अमृतसर से अलग कमेटी बनाने की पैरवी करने वाले झींडा और नलवी को अकाल तख्त ने पंथ से बाहर कर दिया था। अप्रैल में झींडा अकाल तख्त के जत्थेदारों को समक्ष पेश हो गए थे। पंथक सजा के बाहर जत्थेदारों ने उनकी पंथ वापसी कराई थी। नलवी गुट झींडा के इसी कदम से नाराज था।
मान लिया झींडा का स्पष्टीकरण
जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा कि झींडा पर आरोप था कि वे बादल फैमिली के साथ मिलीभगत करके अकाल तख्त पर पेश हुए थे। दादूवाल ने बताया कि इस मामले में झींडा ने अपना स्पष्टीकरण दिया, जिससे पूरा हाउस संतुष्ट हो गया। झींडा ने कहा था कि बादल परिवार की वजह से नहीं, बल्कि अकाल तख्त के प्रति सम्मान के चलते पेश हुए थे।
जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा कि झींडा पर आरोप था कि वे बादल फैमिली के साथ मिलीभगत करके अकाल तख्त पर पेश हुए थे। दादूवाल ने बताया कि इस मामले में झींडा ने अपना स्पष्टीकरण दिया, जिससे पूरा हाउस संतुष्ट हो गया। झींडा ने कहा था कि बादल परिवार की वजह से नहीं, बल्कि अकाल तख्त के प्रति सम्मान के चलते पेश हुए थे।
3 मेंबर बाहर, 3 अंदर: तीन वरिष्ठ सदस्यों हरपाल सिंह पाली, गुरमीत सिंह तिलोकेवाल व भूपेंद्र सिंह असंध की मीटिंगों में आने की असमर्थता को देखते हुए उन्हें सदस्यता से मुक्त करने का फैसला किया। इनके स्थान पर करनैल सिंह निमनाबाद, जसबीर सिंह भाटी व बलदेव सिंह बल्ली को नए सदस्यों के तौर पर कार्यकारिणी में शामिल किया गया।
14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
वरिष्ठ उपप्रधान दीदार सिंह नलवी ने कहा कि एसजीपीसी से अलग होकर एचएसजीपीसी बनाने के मामले में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा जा सके, इसलिए सभी पक्ष एक साथ आए हैं। उसके बाद जगदीश झींडा और महासचिव जोगा सिंह इस्तीफा देंगे। झींडा के राजनीतिक दल बनाने से उनका कोई लेना-देना नहीं। हालांकि झींडा ने कहा बैठक में उनके इस्तीफे देने को लेकर कोई बात नहीं हुई है।
वरिष्ठ उपप्रधान दीदार सिंह नलवी ने कहा कि एसजीपीसी से अलग होकर एचएसजीपीसी बनाने के मामले में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा जा सके, इसलिए सभी पक्ष एक साथ आए हैं। उसके बाद जगदीश झींडा और महासचिव जोगा सिंह इस्तीफा देंगे। झींडा के राजनीतिक दल बनाने से उनका कोई लेना-देना नहीं। हालांकि झींडा ने कहा बैठक में उनके इस्तीफे देने को लेकर कोई बात नहीं हुई है।





