जिन देशों से ‘रोटी, कर्जा और काम’ मांगता है पाकिस्तान, उनसे भारत करने जा रहा है बड़ी डील

पहले यूरोपीय यूनियन (EU FTA) और फिर अमेरिका (India-US Trade Deal) के साथ ट्रेड डील करके, भारत आर्थिक व व्यापारिक मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब इसी कड़ी में अगली तैयारी खाड़ी सहयोग परिषद के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की है। दरअसल, भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए औपचारिक रूप से बातचीत शुरू करके वैश्विक व्यापार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।
यह कदम भारत के लिए बड़ी उपलब्धि होने के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। दरअसल, इस ट्रेड डील को लेकर समय विशेष रूप से मायने रखता है, क्योंकि यह पाकिस्तान के बढ़ते आर्थिक संकट और खाड़ी देशों के लिए रक्षा और रणनीतिक साझेदार के रूप में खुद को स्थापित करने के प्रयासों के बीच हो रहा है।
क्या है GCC?
गल्फ कूपरेशन काउंसिल (GCC) खाड़ी देशों का समूह है, जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन है। 1981 में स्थापित इस समूह का उद्देश्य अपने सदस्यों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। यह संगठन सालों से एनर्जी, फाइनेंस, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रसद के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।
इस डील से पाकिस्तान को क्या नुकसान?
खाड़ी देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता पाकिस्तान के लिए आर्थिक और राजनीतिक दोनों तरीकों से बहुत मायने रखता है। राजनीतिक मामलों को लेकर इस्लामाबाद हमेशा से भारत से मतभेद के मामलों को इस्लामिक देशों और खाड़ी देशों से जुड़े मंचों पर उठाता रहता है। वहीं, आर्थिक मामलों के लिहाज से खाड़ी देशों के साथ भारत का FTA पाकिस्तान के लिए कुछ कारणों से सिरदर्द बन सकता है। इनमें:
टैरिफ में कमी: खाडी़ देशों के साथ FTA लागू होने के बाद भारतीय वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले आयात शुल्क या तो बहुत कम हो जाएंगे या खत्म हो जाएंगे।
लागत से कॉम्पिटिशन बढ़ेगा: मुक्त व्यापार समझौते के तहत GCC मार्केट्स में भारतीय सामानों की लागत पाकिस्तानी उत्पादों की तुलना में कम हो जाएगी, जिससे उन्हें एक बड़ा कॉम्पिटिटिव लाभ मिलेगा। क्योंकि, दोनों ही देश खाड़ी देशों को कृषि उत्पाद, कपड़ा, और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात करते हैं।
निर्यात में गिरावट: कम प्रतिस्पर्धी होने के कारण, GCC बाज़ारों में पाकिस्तान के निर्यात की मांग घट सकती है, जिससे पाकिस्तान की बाज़ार हिस्सेदारी कम हो सकती है।
रणनीतिक और राजनयिक प्रभाव
खाड़ी देश, विशेषकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE), पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। लेकिन, भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता उनकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत दे सकता है। हालिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान, वित्तीय भुगतान के बजाय सैन्य साजो-सामान और रक्षा सहयोग की पेशकश करके कर्ज की भरपाई करने के प्रयास कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, तुर्की जैसे प्रमुख क्षेत्रीय देशों ने सऊदी अरब को शामिल करते हुए एक व्यापक इस्लामी रक्षा गुट बनाने के इस्लामाबाद के प्रयासों से खुद को अलग कर लिया है। कुल मिलाकर, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और भारत के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पाकिस्तान के लिए आर्थिक और रणनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है।





