जानें क्यों देवर्षि नारद जी को जीवान भर अविवाहित रहने का मिला था श्राप, जरुर जाने ये बड़ा रहस्य

अक्सर हिन्दू धर्म में सभी देवताओं को उनकी देवी के नाम के साथ स्मरण किया जाता है लेकिन देवऋषि नारद को सदैव के लिए अविवाहित होने का श्राप प्राप्त है। जिसके कारण उन्हें देवऋषि के नाम से स्मरण किया जाता है। देवऋषि नारद को इस सृष्टि का पहला पत्रकार कहा जाता है।

अविवाहित होने का श्राप:
सृष्टि के रचियता ब्रह्मदेव के आठ मानस पुत्रों में से एक नारद जी उनके कंठ से पैदा हुए है। सृष्टि विस्तार के लिए ब्रह्मा जी ने अपने आठों पुत्रों को विवाह करने का आदेश दिया पर नारद जी ने ब्रम्हा जी का यह आदेश मानकर विवाह करने से इनकार कर दिया।
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ब्रह्मा जी रुष्ट होकर दिया ये श्राप:
नारद जी के इंकार से ब्रह्मा जी रुष्ट हो गए और उन्होंने नारद जी श्राप दिया कि “तुमने मेरी आज्ञा नहीं मानी, इसलिए तुम्हारा समस्त ज्ञान नष्ट हो जाएगा और तुम गन्धर्व योनी को प्राप्त होकर कामिनीयों के वशीभूत हो जाओगे।’’





