जानिए सूरज की गर्मी और तंदुरुस्त पेट का सीधा संबंध क्या है…

आप किसी महानगर की लोकल ट्रेन में सफर करते हों, या आराम से किसी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बैठ कर कोई अखबार पढ़ते हों, तो पेट की बीमारियों के विज्ञापन हर कहीं दिखाई देते हैं। जीवनशैली और खान-पान के तौर-तरीकों में बदलाव ने हमें कई बेसिक बातों से ही दूर कर दिया है।

अब अगर आपसे यह कहा जाए कि सूरज की गर्मी (धूप) और आपके पेट की सेहत का नाता है तो आप चौंकेगे ही न। लेकिन यह बात सौ फीसदी खरी है और आज आपको हम यही बताने जा रहे हैं कि यह रिश्ता आखिर है क्या। खासतौर से उन लोगों के लिए जो घर से बगैर सनस्क्रीन लगाए बाहर निकलते ही नहीं हैं। यह सच  है कि सूरज की तेज रोशनी (अल्ट्रावॉयलेट किरणें) हमारी त्वचा को झुलसा सकती हैं, कई बार तो यह कैंसर तक की वजह बन सकती हैं। लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हम धूप का आनंद ही न लें। सर्दियों के दिनों में कुछ इलाकों में मुश्किल है, लेकिन सुबह की धूप का कोई जवाब नहीं होता।

प्रतिष्ठित पत्रिका फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित नई रिसर्च के मुताबिक हमारी त्वचा का अल्ट्रावॉयलेट किरणों से संपर्क हमारे पेट की सेहत के लिए अच्छा हो सकता है। अध्ययन में कहा गया है विटामिन डी के सिंथेसिस के लिए अल्ट्रावॉयलेट किरणें महत्वपूर्ण हैं। विटामिन डी हमारी आंतों में मौजूद स्वस्थ सूक्ष्मजीवों का बेहतर विकास सुनिश्चित करता है। यही सूक्ष्मजीव हमें पेट के रोगों से बचाते हैं।

सनशाइन विटामिन
विटामिन डी को सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है। यह हमारी स्वस्थ हड्डियों और मजबूत दांतों के लिए जरूरी होता है। लेकिन विटामिन डी के हमारे शरीर के लिए उपयोगी होने के लिए दो बातें जरूरी होती हैं, पहला कोलेस्ट्रॉल और दूसरा अल्ट्रावॉयलेट बी (यूवीबी) किरणें। दुर्भाग्य से दोनों का नाम कुछ ज्यादा ही बदनाम हो चुका है। सनशाइन विटामिन हमारे रोग प्रतिरोधक सेल्स को ज्यादा प्रभावी और गतिशील बनाता है। विटामिन डी की कमी की स्थिति में ऑटोइम्यून बीमारियों के जड़ पकड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

रिसर्च
पहले चर्चित अध्ययन कनाडा के रिसर्चरों ने 21 स्वस्थ महिलाओं पर सर्दियों के दिनों में किया था। इस दौरान इन महिलाओं को सिवाय प्रयोग के यूवी किरणों के संपर्क से दूर रखा गया। हालांकि उनमें से कुछ अध्ययन से पहले विटामिन डी सप्लीमेंट्स ले रही थीं। अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि सूरज की रोशनी के संपर्क में आने से विटामिन डी के स्तर में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। शरीर में सनशाइन विटामिन की बढ़ोत्तरी के साथ ही पेट की सेहत (गट हेल्थ) में भी सुधार देखा गया।

गट माइक्रोब्स का लाभ 
इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिसीज (आईबीडी) जैसी बीमारियों में हमारे अपने इम्युन सेल्स (जिनका काम हमें बीमारी से बचाना होता है) हमारी आंतों की अंदरूनी लाइनिंग के अलावा पेट में बचे अच्छे रोगाणुओं (माइक्रोब्स) पर हमला बोल देते हैं। परिणाम हमारे पाचनतंत्र की लाइनिंग में सूजन, घाव तक हो जाते हैं।  अध्ययन से पता चला कि सूरज की रोशनी से संपर्क हमारी आंतों के अच्छे बैक्टीरिया के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस तरह से यह आईबीडी के दो मुख्य प्रकारों अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोन्स डिसीज से हमारा बचाव करता है या उनके असर को कम करता है।

 

क्या किया जाए
एक तरफ जहां अल्ट्रावॉयलेट किरणें हमारी त्वचा के लिए खराब हैं तो वह हमारे पाचनतंत्र के लिए औषधि की तरह हैं। अब सवाल है कि यूवीबी के बुरे असर को दूर रखकर हम इसका फायदा कैसे उठाएं। आपके लिए कुछ सुझाव:
अगर आपकी त्वचा सूरज की रोशनी को लेकर संवेदनशील है तो विटामिन डी सप्लीमेंट लीजिए।
सुबह के वक्त 20-30 मिनट के लिए घर से बाहर निकलें। उस वक्त की धूप त्वचा के लिए नुकसानदेह नहीं होती।
पोषक आहार लीजिए। एवोकेडो, मछली और जैतून के तेल की तरह अच्छा फैट।

Back to top button