जानिए, जिंदगी कितनी कीमती और खूबसूरत है, इन जगहों पर जाकर

तिरुअनंतपुरम के सागर किनारे बहुत देर से वह टहल रहे थे। कभी लहरों का पीछा करते तो कभी उससे बच निकलने को होड़ लगाते। बच्चों की तरह कहकहे लगा रहे थे वह। उनकी तरफ सबकी नजर इसलिए भी लगी हुई थी कि वह अच्छे-खासे बूढ़े थे। सफेद चेहरे पर झुर्रियां, चलने में तकलीफ, सिर पर चंद बाल, अकड़े हुए हाथ और पैर।

वह कैलिफोर्निया से आए थे, अपना इलाज करवाने। उन्होंने बताया कि पिछले कुछसमय से उन्हें चर्म रोग है और यहां आने से पहले वह आत्महत्या का मन बना चुके थे। यहां आने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि जिंदगी कितनी कीमती और खूबसूरत है। अरसे बाद उन्होंने अपने साथ समय बिताया था, बिना यह परवाह किए कि लोग क्या कहेंगे। लेखक और साइकोलॉजिस्ट डॉ. डेनिस टेलर कहते हैं,‘अपने काम से अवकाश ले कर छुट्टियों पर जाने का बहुुत गूढ़ अर्थहै। मैं अपने अधिकांश मरीजों को सलाह देता हूं कि वे दवाई लेने के बजाय घूमने जाएं।

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