जहां हकीकत से ज्यादा लोग ख्यालों को देते हैं अहमियत? 5 पॉइंट्स में समझें

हम अक्सर सुनते हैं कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी को किसी ऐसी चीज से प्यार हो जाए जो असल दुनिया में मौजूद ही नहीं है? जी हां, यह सच है। आजकल ‘Fictosexuality’ नाम का एक शब्द काफी चर्चा में है, जहां लोग असली इंसानों के बजाय काल्पनिक किरदारों को अपना दिल दे बैठते हैं (Attraction To Fictional Characters)।

यह पढ़ने में अजीब लग सकता है, लेकिन दुनिया भर में ऐसे हजारों लोग हैं जो अपनी खुशियां हकीकत में नहीं, बल्कि ख्यालों में ढूंढ रहे हैं। आइए, इस अनोखे अट्रैक्शन को आसान भाषा में 5 पॉइंट्स में समझते हैं।

क्या है ‘फिक्टोसेक्शुअलिटी’?
साधारण शब्दों में कहें तो, जब किसी व्यक्ति को किसी किताब, कार्टून, एनिमे, वीडियो गेम या फिल्म के किरदार के प्रति गहरा रोमांटिक या सेक्शुअल अट्रैक्शन महसूस होता है, तो उसे ‘फिक्टोसेक्शुअलिटी’ कहा जाता है। इन लोगों के लिए असली इंसानों के साथ रिश्ता बनाना मुश्किल या अरुचिकर होता है, और वे इन काल्पनिक पात्रों के साथ ही इमोशनल कनेक्शन महसूस करते हैं।

भावनाएं असली होती हैं, भले ही किरदार नकली हों
फिक्टोसेक्शुअल लोगों के लिए उनका प्यार कोई मजाक नहीं होता। वे उस किरदार के लिए ठीक वैसे ही धड़कते हैं, जैसे कोई किसी असली इंसान के लिए धड़कता है। उन्हें उस किरदार की खुशी में खुशी और उसके दुख में दुख होता है। उनके लिए वह किरदार महज एक चित्र या ग्राफिक्स नहीं, बल्कि एक ‘साथी’ होता है।

‘परफेक्ट’ पार्टनर की तलाश
असली दुनिया के रिश्तों में झगड़े, धोखा, और गलतफहमियां होती हैं, लेकिन काल्पनिक दुनिया में सब कुछ हमारे कंट्रोल में होता है। एक काल्पनिक किरदार कभी आपको धोखा नहीं देगा, कभी आपसे बहस नहीं करेगा और हमेशा वैसा ही रहेगा जैसा आप चाहते हैं। कई लोग असली दुनिया के रिश्तों की कड़वाहट से बचने के लिए इस सुरक्षित और ‘परफेक्ट’ दुनिया को चुनते हैं।

जापान का वह शख्स जिसने गुड़िया से शादी की
यह सिर्फ ख्यालों तक सीमित नहीं है। कुछ साल पहले जापान के अकिहिको कोंडो नाम के एक व्यक्ति ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था जब उसने हात्सुने मिकु नाम की एक वर्चुअल सिंगर से शादी कर ली थी। उन्होंने बाकायदा शादी का रिसेप्शन दिया और हजारों डॉलर खर्च किए। यह फिक्टोसेक्शुअलिटी का सबसे बड़ा उदाहरण है।

क्या यह कोई बीमारी है?
मनोवैज्ञानिक इसे कोई मानसिक बीमारी नहीं मानते, जब तक कि यह व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को नुकसान न पहुंचाए। LGBTQ+ समुदाय के तहत, इसे अक्सर Asexuality के एक हिस्से के रूप में देखा जाता है। यह बस प्यार करने का एक अलग तरीका है, जहां व्यक्ति को असली लोगों की तुलना में अपनी कल्पनाओं में ज्यादा सुकून मिलता है।

फिक्टोसेक्शुअलिटी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्यार आखिर क्या है? क्या प्यार के लिए शरीर का होना जरूरी है या सिर्फ एहसास ही काफी है? एक बात तो साफ है कि बदलते वक्त और टेक्नोलॉजी के साथ इंसानी रिश्तों के मायने भी तेजी से बदल रहे हैं।

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