चुनाव आयोग के इस घोषणा से राष्ट्रपति चुनाव में आया जबरदस्त मोड़, अब नहीं होगा…

चुनाव आयोग ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सारे कार्यक्रम और तारीख की घोषणा कर दी है लेकिन इन सब के साथ सबसे बड़ा सवाल जो सबके जहन में उठ रहा है वो ये कि कौन होगा देश का अगला राष्ट्रपति। हांलाकि सबको मालूम है कि इस रेस में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन (एनडीए) सबसे आगे चल रहा है। हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश पार्टी को मिली बंपर जीत के बाद एनडीए पहले ही विपक्ष पर हावी थी। लेकिन दक्षिण की पार्टियों एआइएडीएमके, टीआरएस और वाइएसआर कांग्रेस को भी अपने फेवर में लेने के बाद एनडीए का पलड़ा और भी भारी हो गया है।चुनाव आयोग के इस घोषणा से राष्ट्रपति चुनाव में

राष्ट्रपति चुनाव के लिए जरूरी वोटों में विपक्ष के पास कुल 48.53 फीसदी वोट थे, जो कि एनडीए के 48.64 फीसदी से नाममात्र ही कम हैं। लेकिन दक्षिण में तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के तीन दलों का साथ मिलने के बाद जीत की गेंद एनडीए के पाले में ही आ गिरेगी।

लोकसभा में 543 और राज्यसभा के प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 708 है। इसके साथ ही देशभर के 4,120 विधायकों और 776 सांसदों को मिलाकर चुनाव मंडल बनता है। जिनके मतों का कुल मूल्य 10,98,882 है और किसी भी प्रत्याशी को पदासीन होने के लिए 5,49,442 मतों की ही जरूरत होती है।

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शिवसेना दे सकती है बड़ा सिरदर्द

जहां एक ओर राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचने के लिए एनडीए का रास्ता एकदम साफ दिखाई दे रहा है वहीं ऐसे में भाजपा की पूर्व सहयोगी रही शिवसेना मोदी शाह तिकड़मी जोड़ी को जोर का झटका दे सकती है। दरअसल शिवसेना पिछले कई दिनों से राष्ट्रपति पद के लिए जिस एक नाम पर जोर दे रही है वो है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का। हांलाकि शिवसेना ने साफ तौर पर तो भागवत का नाम नहीं लिया। लेकिन यह जरूर कहा है कि राष्ट्रपति भवन में हिंदुत्व का रबर स्टांप ही होना चाहिए।

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