चीनी गुच्छी के आगे फीका पड़ गया हिमाचल का कारोबार


हिमाचल के जंगलों में प्राकृतिक रूप से पैदा होने वाली गुच्छी पर इस बार चीन की मार पड़ी है। चीन में गुच्छी को खेती से तैयार किया गया। इससे हिमाचल के गुच्छी के दाम अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी गिर गए हैं।
पिछली साल 9000 रुपये प्रति किलो तक बिकने वाली गुच्छी अभी 6500 के पार नहीं जा रही है। चीन खेती से तैयार गुच्छी को आधे दामों पर कई देशों में निर्यात कर रहा है। पड़ोसी मुल्क में गुच्छी की खेती होने से इसका असर हिमाचल के गुच्छी व्यापारियों पर पड़ा है।
सूबे में फरवरी-मार्च में गुच्छी का सीजन समाप्त हो चुका है। कुल्लू, बंजार सहित अन्य क्षेत्रों के व्यापारियों के पास स्टॉक डंप है। व्यापारी मार्केट में गुच्छी के दाम बेहतर मिलने के इंतजार में हैं, जबकि इस बार घाटी में गुच्छी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।
जिले के दूरदराज क्षेत्रों में ग्रामीण दो से ढाई महीने तक गुच्छी इकट्ठा करते हैं। जिले में 30 प्रतिशत लोगों की आधा साल की कमाई का जरिया जंगलों में मिलने वाली गुच्छी ही है।





