घोर लापरवाही : बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के सौंप दिया कोरोना संदिग्ध का शव, डीएम ने दिए जांच के आदेश

सीतापुर । कोरोना संदिग्ध की मौत के मामले में जिला अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यहां मरीज की मौत के बाद भी उसके परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र देना जरुरी नहीं समझा गया। इतना ही नहीं मरीज की कोरोना जांच रिपोर्ट का भी अब तक कुछ पता नहीं है। मामला सोशल मीडिया में वायरल होने पर अधिकारियों ने संज्ञान लिया और एक कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए है। वहीं अस्पताल प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम के लिए ड्यूटी पर तैनात डाॅक्टर को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
शहर कोतवाली इलाके के मिरदही टोला निवासी अनुराग सक्सेना के पिता कृष्ण प्रकाश सक्सेना पिछले दो दिनों से बीमार चल रहे थे। बुधवार को उनकी अचानक तबियत बिगड़ गई। आनन फानन में वह अपने पिता को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। कोरोना के लक्षण होने के कारण अनुराग ने अपने पिता का सैंपल जांच के लिए दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज शुरु किया गया, लेकिन कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने शव को सेनेटाइज कर परिजनों को सौंप दिया, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डाॅ एमके प्रजापति द्वारा परिवार को मृत्यु प्रमाण पत्र देना जरुरी नहीं समझा गया। इसके बाद भी परिजनों ने कई बार संबंधित डाॅक्टर से प्रमाण पत्र व कोरोना जांच रिपोर्ट की मांग की। कोई सुनवाई न होने पर उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। अनुराग ने वीडियो में यह भी बताया है कि मंगलवार को भी उन्हें जांच कराने के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन वहां सिर्फ सर्दी-खांसी के दवा देकर घर भेज दिया गया था।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद डीएम अखिलेश तिवारी ने मामले को संज्ञान में लिया और एसीएमओ डाॅ उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। मामले को तूल पकड़ता देख फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने प्रमाण पत्र बनवा दिया है, लेकिन अब तक वह परिजनों तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में अब तक परिजन शव का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाए हैं।





