गर्मियों में दून में पेयजल किल्लत का बड़ा कारण….

गर्मियों में दून में पेयजल किल्लत का बड़ा कारण पेयजल लाइनों से होने वाली लीकेज भी है। जिस पानी से लाखों लोगों के हलक तर किए जा सकते हैं, वह पेयजल लाइनों की लीकेज में बर्बाद हो रहा है। नतीजा यह है कि उपभोक्ताओं के घरों तक पर्याप्त पानी की सप्लाई नहीं हो रही। इससे लोग पेजयल के लिए तरसने लगे हैं। 
मानकों की बात करें तो पेयजल लाइनों में लीकेज अधिकतम पांच फीसद होनी चाहिए, लेकिन दून में इसका आंकड़ा 20 से 30 फीसद से अधिक है। हैरत की बात तो यह है कि लीकेज की यह समस्या कई साल से है, लेकिन जल संस्थान इसको लेकर गंभीरता से प्रयास नहीं करता नजर नहीं आ रहा है। जल संस्थान के आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना 60 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) से अधिक पानी लीकेज से ही बर्बाद हो जाता है।
दून में गर्मी शुरू होते ही जल संस्थान के लिए पेयजल आपूर्ति चुनौती बन जाता है। गर्मियों में भूजल स्तर नीचे चले जाने और स्रोतों में पानी कम हो जाने के कारण पानी की सप्लाई और डिमांड में काफी अंतर आ जाता है। ऊपर से लाइनों में लीकेज समस्या को और बढ़ा देती है। दून के चारों जोन (दक्षिण, उत्तर, पित्थूवाला व रायपुर) में ऐसी लाइनों की भरमार है, जो 30-40 वर्ष पुरानी हैं।
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इसमें से अधिकतर लाइनें जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। तो कई लाइन सड़कों के काफी नीचे दब चुकी है। जिससे इन लाइनों में लीकेज ढ़ूंढना जल संस्थान के लिए टेढ़ी खीर बन जाती है। पुरानी लाइन होने के कारण एक बार लीकेज होने पर यह बार-बार लीक होती रहती है। हालांकि, दून के दक्षिण व उत्तर जोन में पुरानी लाइनों की जगह एडीबी के वित्त पोषण से नई लाइनें बिछाई गई हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर लाइनें आधी-अधूरी ही बिछाई गई हैं।
जो लाइनें बिछी भी हैं उनमें से अधिकतर में अभी तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई। इससे अब भी लीकेज के कारण हर रोज लाखों लीटर पानी सड़कों पर बर्बाद हो रहा है। हैरत की बात तो यह है कि लीकेज के रूप में बर्बाद होने वाले इस पानी को लेकर जल संस्थान भी गंभीर नहीं दिख रहा।

लीकेज ठीक करने के लिए दिए निर्देश
जल संस्थान की महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग के अनुसार, दून में लीकेज से हर दिन लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है। इसका कारण वर्षों पुरानी पेयजल लाइनें हैं। सभी जोन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी लीकेज की सूचना मिले, तत्काल उन्हें ठीक किया जाए। जिससे कि पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
मोटर फुंकने और लो प्रेशर से पेयजल के लिए तरसे लोग
गर्मी की तपिश बढ़ते ही राजधानी के ग्रामीण सहित शहरी क्षेत्र में पेयजल की किल्लत शुरू हो गई है। मंगलवार को ट्यूबवेल की मोटर फुंकने से लोगों को घंटों पानी नहीं मिला तो बद्रीश कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों में लो प्रेशर के कारण लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
गर्मी बढ़ते ही भूजल का स्तर नीचे चला गया है। जिससे कई क्षेत्रों में लो प्रेशर की समस्या उत्पन्न होने लगी है। लो प्रेशर के कारण लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिससे लोग किसी तरह अपने लिए पेयजल की व्यवस्था कर रहे हैं।
इस संबंध में बद्रीश कॉलोनी के लोगों ने अधिशासी अभियंता, उत्तर जोन वाइएस मल्ल से भी मुलाकात की। उधर, नवादा में ट्यूबवेल की मोटर फुंकने के कारण नावादा क्षेत्र में कई घंटे पेयजल की आपूर्ति ठप रही, जिससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। शाम के समय मोटर ठीक करने के बाद ही लोगों को पानी नसीब हो पाया। उधर, दक्षिण जोन के विजय कॉलोनी, मोथेरावाला, पलटन बाजार, धामावाला क्षेत्र में भी लो प्रेशर की समस्या से लोग पेयजल के लिए परेशान रहे।





