खंड शिक्षा अधिकारी के रहमों करम से कुठौद ब्लाक के अधिकांश प्राथमिक विद्यालय बंद!

खंड शिक्षा अधिकारी ने पत्रकार को मुकदमे में फंसाने की दी धमकी!
जालौन। ब्लॉक कुठौंद क्षेत्र के ईंटो न्याय पंचायत के ग्राम अब्दुल्लापुर के प्राथमिक विद्यालय के बंद होने के बारे में जानकारी लेने के आदान-प्रदान पर खंड शिक्षा अधिकारी महेश शर्मा ने पत्रकार के साथ ही अभद्रता कर दी और उसे कोर्ट में घसीट ने की धमकी भी दे डाली। न्याय पंचायत क्षेत्र के ग्राम अब्दुल्लापुर का प्राथमिक विद्यालय बंद था। जिसके बारे में पत्रकारों ने वहां अध्यापकों से बात करनी चाही तो उन्होंने यह कह दिया कि जाओ ऊपर अधिकारियों से शिकायत कर दो हम पैसा देते हैं। हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।
इस सम्बन्ध की सूचना व जानकारी के लिए पत्रकार द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी से फोन द्वारा वार्ता की गई। जिस पर उन्होंने पत्रकार के साथ ही अभद्रता कर डाली और उस पर मानहानि का मुकदमा करने की बात कही। उल्टा पत्रकार पर आरोप लगाया कि वह गलत सूचना देते हैं। पत्रकार ने यह कहा कि आप अभी आकर विद्यालय का निरीक्षण कर सकते हैं। तब खंड शिक्षा अधिकारी महोदय शांन्त हुए वर्तमान समय में कुठौंद ब्लाक के अधिकांश प्राइमरी विद्यालयों के हालात बहुत बत्तर हाल में है।
कोई भी विद्यालय निश्चित समय पर नहीं खुलता है। अध्यापक उपस्थित नही रहते हैं। और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। देश को शिक्षित करने के लिए। सरकार बिभिन्न योजनाएं चलाकर शिक्षा को मजबूत करने के लिए लाखों करोड़ों रुपए हर वर्ष खर्च करती है। लेकिन शिक्षा विभाग में बैठे कुछ अधिकारी शासन के आदेशों को ताख में रखकर अपनी मन मर्जी से काम कर रहे है। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत को सिद्ध करते हुए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम कर रहे है। और शिक्षा को चौपट कर रहे है।
माना जाए तो खंड शिक्षा अधिकारी के रहमों करम पर यह सभी विद्यालय बंद रहते हैं। जब कोई अपनी आवाज उठाता है। तो खंड शिक्षा अधिकारी महोदय उसके खिलाफ मुकदमा करने की बात कहते हैं। और धमकाने लगते है। पत्रकारों ने माननीय मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर उक्त प्रकरण की जानकारी अधिकारियों को देकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी माँग की है कि विद्यालय समय पर खोले व बंद किए जाएं ताकि सरकार की मंशानुरुप कार्य हो सके। शिक्षा के मन्दिरों का सुधार हो सके और प्राईमरी विघालयों में पढ़ रहे बच्चें शिक्षित हो सके।





