क्या मिनरल सनस्क्रीन वाकई ‘केमिकल-फ्री’ है? लैब टेस्ट ने खोली दावों की पोल

हम सभी जानते हैं कि तेज धूप और सूरज की हानिकारक किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन कितना जरूरी है। अक्सर एक्सपर्ट घर से निकलने से पहले इसे लगाने की सलाह देते हैं। आजकल कई लोग केमिकल के डर, प्रदूषण और त्वचा पर होने वाले प्रभावों की चिंता के कारण साधारण सनस्क्रीन की जगह ‘मिनरल सनस्क्रीन’ का इस्तेमाल करना बेहतर मानते हैं, लेकिन क्या ‘मिनरल सनस्क्रीन’ सच में वैसी है जैसा हम सोचते हैं? हाल ही में हुए एक अध्ययन ने इस दावे की पोल खोल दी है।
तेज धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। बाहर निकलने से पहले इसे लगाने की सलाह हर जगह दी जाती है, लेकिन जब बात आती है केमिकल बनाम मिनरल सनस्क्रीन की, तो लोगों में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। बहुत से लोग यह मानकर मिनरल सनस्क्रीन चुनते हैं कि इनमें कोई केमिकल नहीं होता और ये सिर्फ सूर्य की किरणों को रिफ्लेक्ट करती हैं। हालांकि, सच इससे काफी अलग है और वैज्ञानिक रूप से काफी दिलचस्प भी।
मिनरल बनाम केमिकल सनस्क्रीन
हाल के वर्षों में मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। कई उपभोक्ता मानते हैं कि:
मिनरल सनस्क्रीन पूरी तरह केमिकल-फ्री होती है
केमिकल सनस्क्रीन हानिकारक साबित हो चुकी हैं
केमिकल फॉर्मूले सूर्य की किरणों को सोखते हैं, जबकि मिनरल उन्हें परावर्तित करते हैं
हालांकि, असल में ये दावे अधूरे और भ्रामक हैं। वैज्ञानिक परीक्षण बताते हैं कि मिनरल सनस्क्रीन भी केमिकल प्रक्रियाओं पर ही आधारित होते हैं और कई बार इनमें अतिरिक्त केमिकल मिश्रण भी शामिल होते हैं।
लैब टेस्ट ने खोला बड़ा सच
इन दावों की जांच के लिए शोधकर्ताओं ने दो महत्वपूर्ण कदम उठाए:
10 सनस्क्रीन को लैब में टेस्ट किया गया
100 से अधिक सनस्क्रीन की इंग्रेडियंट लिस्ट की विस्तृत समीक्षा की गई
नतीजा चौंकाने वाला रहा- कई ऐसे उत्पाद जो बाजार में “केवल मिनरल” के रूप में बेचे जाते हैं, वास्तव में केमिकल मिश्रण पर निर्भर पाए गए। विशेषकर वे मिश्रण जो सन प्रोटेक्शन फैक्टर (SPF) को बढ़ाने में मदद करते हैं।
मिनरल सनस्क्रीन में क्या होता है?
मिनरल सनस्क्रीन आमतौर पर जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड से बनाए जाते हैं।
दूसरी ओर, केमिकल सनस्क्रीन में अवोबेंजोन, ऑक्सीबेंजोन और ऑक्टिनोक्सेट जैसे तत्व उपयोग किए जाते हैं।
यहां समझने वाली बात यह है कि जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड भी केमिकल एंजाइम हैं- अंतर सिर्फ इतना है कि ये मिनरल सोर्स से आते हैं।
मिनरल सनस्क्रीन भी यूवी को ‘सोखते’ हैं
लंबे समय से यह मिथ फैला हुआ है कि मिनरल सनस्क्रीन केवल यूवी किरणों को परावर्तित करते हैं, लेकिन शोध बताता है:
जिंक ऑक्साइड जैसे मिनरल यूवी प्रकाश को अवशोषित भी करते हैं
ऑर्गेनिक/केमिकल सनस्क्रीन विशेष आवृत्तियों में अवशोषण के पीक दिखाते हैं
यानी मिनरल और केमिकल- दोनों प्रकार के सनस्क्रीन यूवी से सुरक्षा के लिए अवशोषण प्रक्रिया पर निर्भर होते हैं। परावर्तन सिर्फ आंशिक भूमिका निभाता है।
हाई एसपीएफ के पीछे केमिस्ट्री की अहम भूमिका
यह समझना जरूरी है कि हाई-एसपीएफ वाले मिनरल सनस्क्रीन केवल जिंक ऑक्साइड पर आधारित नहीं होते। लैब परीक्षणों में पाया गया:
जिंक ऑक्साइड अकेले यूवी स्पेक्ट्रम में सभी तरह की किरणों को समान रूप से नहीं रोक पाता है।
प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए मिनरल सनस्क्रीन में भी अतिरिक्त यूवी-अवशोषक केमिकल्स का उपयोग किया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया के थेरैप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन रजिस्टर में सूचीबद्ध 143 मिनरल सनस्क्रीन में कई बार ऐसे मिश्रण मिले जो स्पष्ट रूप से ‘खालिस मिनरल’ नहीं थे।
यानी बेहतर सुरक्षा देने के लिए मिनरल फॉर्मूले भी केमिकल प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं।
लेबल से ज्यादा विज्ञान के मायने
सनस्क्रीन चुनते समय सिर्फ “मिनरल” या “केमिकल” का लेबल देखकर निर्णय लेना हमेशा सही नहीं होता। दोनों ही प्रकार के सनस्क्रीन वैज्ञानिक रूप से तैयार किए जाते हैं, यूवी सुरक्षा के लिए केमिकल अवशोषण तकनीक का उपयोग करते हैं और SPF बढ़ाने के लिए कई बार अतिरिक्त केमिकल मिश्रण शामिल करते हैं। अंतर केवल उनके स्रोत और कार्य-तंत्र में है, न कि इस बात में कि एक पूरी तरह “केमिकल-फ्री” है।
तेज धूप से बचाव का सबसे कारगर तरीका है- सही एसपीएफ चुनना, समय पर सनस्क्रीन लगाना और जरूरत पड़ने पर दोबारा लगाना। सनस्क्रीन का विज्ञान जितना गहरा है, उतना ही जरूरी है इसे सही तरीके से समझना।





